मेरे सपनों का भारत ऐसा हो जो तकनीक, संसाधन और आत्मनिर्भरता का भारत बने
बेमेतरा । "2047 तक भारत ऐसा विकसित राष्ट्र बने जहाँ देश की आगोश में छिपी रचना का बेहतर उपयोग हो, तकनीक के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बने और खनिज संसाधनों का उपयोग देश के विकास के लिए हो।" यह है शासकीय कन्या विद्यालय की छात्रा कुमारी डामेश्वरी सोनी के सपनों का भारत। उसकी सोच में केवल किताबी कल्पना नहीं, बल्कि धरती से जुड़ा यथार्थ है।
छत्तीसगढ़ की बेटी होने के नाते वह जानती है कि हमारे राज्य में खनिज संपदा की अपार शक्ति है। वह चाहती है कि इस संपदा का उपयोग केवल खनन तक सीमित न रहे, बल्कि यहीं पर उद्योग, रोजगार और तकनीक का विकास हो, ताकि गांव के युवाओं को बाहर न जाना पड़े।
उसका दूसरा सपना तकनीकी आत्मनिर्भरता का है। वह ऐसा भारत देखना चाहती है जहाँ सेमीकंडक्टर से लेकर स्पेस टेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारत दुनिया का नेतृत्व करे। विदेशों पर निर्भरता खत्म हो और 'मेड इन इंडिया' तकनीक पूरी दुनिया में पहुंचे।
डामेश्वरी का मानना है कि जब प्राकृतिक संसाधन, युवा प्रतिभा और स्वदेशी तकनीक एक साथ मिलेंगे, तभी 2047 का विकसित भारत साकार होगा। उसकी यह सोच विकसित भारत के संकल्प को नई ऊर्जा देती है।