कहानी सेवा की’ : सेवा संकल्प से आत्मनिर्भरता की राह पर बरदिया के आदिवासी मछुआरे, मत्स्य पालन से आय में उल्लेखनीय वृद्धि
कोरिया, 21 सितंबर, 2026
सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से शासकीय योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और लोगों को आत्मनिर्भर आजीविका से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कोरिया जिले के बरदिया गांव की आदिवासी मछुआ सहकारी समिति मर्यादित बरदिया के सदस्यों ने मत्स्य पालन को आजीविका का सशक्त माध्यम बनाकर इस संकल्प को जमीन पर साकार किया है।
समिति के अध्यक्ष व हितग्राही श्रीमती महिमा सिंह के नेतृत्व में समिति के 35 सदस्य मत्स्य पालन गतिविधियों से जुड़े हैं। पहले आजीविका मुख्य रूप से कृषि कार्य पर निर्भर थी। सीमित कृषि आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाई आती थी। अतिरिक्त आय की आवश्यकता को देखते हुए समिति ने कृषि के साथ मत्स्य पालन को व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में अपनाने का निर्णय लिया।
समिति द्वारा ग्राम के शासकीय जलाशय को 10 वर्षीय पट्टे पर लेकर मत्स्य पालन प्रारंभ किया गया। मत्स्य पालन विभाग की मत्स्य पालन प्रसार योजना से समिति को आवश्यक संसाधन और विभागीय मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। योजना के तहत 01 नग आइस-बॉक्स 6,000 रुपये तथा 01 नग महाजाल 10,000 रुपये शत-प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया गया। इसके साथ ही 45 पैकेट मत्स्य बीज, जिसकी राशि 6,300 है, 50 प्रतिशत अनुदान पर प्रदान किए गए।
शासकीय सहयोग और समिति के सामूहिक प्रयास से जलाशय में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिला। मत्स्य पालन से प्राप्त आय ने समिति के सदस्यों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
25 हजार रुपये बढ़कर 3 लाख रुपए हुई वार्षिक आय
मत्स्य पालन को आजीविका से जोड़ने का प्रत्यक्ष असर आय में दिखाई दिया है। योजना से पहले अनुमानित आय लगभग 9,000 प्रतिमाह यानी 1.08 लाख वार्षिक थी, जो वर्तमान में बढ़कर लगभग 25,000 प्रतिमाह यानी 3 लाख वार्षिक हो गई है। यानी मासिक आय में लगभग 16,000 की वृद्धि हुई है।
आय में वृद्धि से परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहूलियत हुई है। साथ ही समिति के सदस्यों के सामाजिक स्तर और जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव आया है। नियमित आय का स्रोत मिलने से समिति के सदस्य आर्थिक रूप से मजबूत होते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
योजना ने उपलब्ध कराए जरूरी संसाधन
मत्स्य पालन प्रसार योजना के तहत प्राप्त मत्स्य बीज, महाजाल और आइस-बॉक्स ने समिति के सदस्यों को मत्स्य पालन कार्य को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद की। विशेष रूप से महाजाल और आइस-बॉक्स शत-प्रतिशत अनुदान पर मिलने से आवश्यक उपकरणों पर होने वाला आर्थिक भार कम हुआ। वहीं 50 प्रतिशत अनुदान पर मत्स्य बीज मिलने से समिति कम लागत में पर्याप्त मत्स्य बीज का संचयन कर सकी।
हितग्राही का प्रत्यक्ष कथन
श्री सिंह, अध्यक्ष, आदिवासी मछुआ सहकारी समिति मर्यादित बरदिया ने कहा-
“पहले हमारी आय मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन होता था। मत्स्य पालन को अपनाने और विभाग से मत्स्य बीज तथा आवश्यक उपकरण मिलने से हमें बहुत सहयोग मिला। अब मत्स्य पालन से नियमित आय प्राप्त हो रही है और समिति के सदस्यों की आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हुई है। हम सभी मिलकर इसे आगे बढ़ाते हुए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं।”
सेवा संकल्प का सार-योजना से अवसर, अवसर से आत्मनिर्भरता
बरदिया की आदिवासी मछुआ सहकारी समिति की यह सफलता सेवा संकल्प अभियान के उस भाव को रेखांकित करती है, जिसमें शासकीय योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंदों को केवल सहायता नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। शासकीय योजना, विभागीय मार्गदर्शन और समिति की सामूहिक भागीदारी से मत्स्य पालन आज बरदिया के मछुआ परिवारों के लिए आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन रहा है।