’कहानी सेवा की’ : स्वयंसिद्धा कविता विश्वकर्मा अब हैं कैलाशपुर गांव की लखपति दीदी
कोरिया । अपने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के साथ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिषन बिहान से जुड़कर कविता विष्वकर्मा अब अपने व्यवसाय का सफल संचालन कर रही हैं। कोरिया जिले के ग्राम पंचायत कैलाषपुर के ग्राम तेलीमुड़ा में रहने वाली एक सामान्य गृहिणी कविता अब गांव की लखपति दीदी हैं।
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वयंसिद्धा योजना के तहत महिलाओं को आगे लाने के लिए दिए एक विकल्प का चयन करके कविता ने अपने लिए आर्थिक मदद जुटाई और वह अब गांव में एक सफल महिला व्यवसायी के तौर पर पहचान बना चुकी हैं। स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद दृढ़ आत्मविष्वास और स्वयंसिद्धा योजनांतर्गत प्राप्त आर्थिक मदद से कविता ने स्वयं का रोजगार स्थापित कर स्थायी आजीविका गतिविधी से जोड़ लिया है। इससे उनका सामाजिक और पारिवारिक महत्व बढ़ा है साथ ही वह एक आत्मनिर्भर महिला बनकर गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
कठिनाई भरा जीवन :
विकासखंड सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत कैलाषपुर के ग्राम तेलीमुड़ा में धनलक्ष्मी महिला स्व- सहायता समूह में जुडने के बाद उन्हें समूह मे अध्यक्ष की तरह काम करने का मौका मिला। इस समय वह घर की एक सामान्य गृहिणी की तरह जीवनयापन कर रही थीं जिसमे उन्हे हर छोटी बड़ी आवष्यकता के लिए परिवार पर आश्रित रहना पड़ता था। सामान्य किसान परिवार होने के कारण आर्थिक संकट हमेषा बना रहता था। इस बात ने कविता को स्वयं अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रेरित किया। अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार करने की सोच रखते हुये स्व- सहायता समूह के माध्यम से आर्थिक मदद प्राप्त की और कविता ने पहले सिलाई का कार्य शुरू किया और फिर बाद में कपड़े की दुकान भी आरंभ कर दी। आज उनके पास स्वयं का व्यवसाय हैं और इससे वह प्रतिवर्ष लाख रूपए से ज्यादा लाभ अर्जित कर रही हैं।
आर्थिक मदद :
बिहान से जुड़ने के बाद कविता ने पहले बैंक ऋण के माध्यम से पचास हजार रूपए लोन प्राप्त किया और अपने घरेलू कार्यों के साथ सिलाई सेंटर का कार्य आरंभ किया। इस कार्य में लगने वाला कपड़ा और बाकी सामान इन्हे बाजार से लेना पड़ता था। अपने सिलाई के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए कविता ने प्रधानमंत्री स्व्यंसिद्धा योजनांतर्गत एक लाख रूपए का ऋण प्राप्त किया और अपना व्यवसाय बढ़ाया। अब उनके पास खुद की कपड़े मनिहारी की दुकान के साथ सिलाई सेंटर है। इन सभी कार्यों से वह प्रतिवर्ष दो लाख रूपए से ज्यादा का लाभ अर्जित कर रही हैं।
स्वयंसिद्धा से बढ़ा आत्मविष्वास :
कैलाषपुर की कविता कहती हैं कि पहले सिलाई में कम मुनाफा होता था क्योंकि उसमे लगने वाला हर सामान बाजार से मंहगे दामों में लेना पड़ता था, फिर उन्होने स्वयंसिद्धा योजना का लाभ लेते हुए ऋण प्राप्त किया और अब उन्हे सामग्री की लागत बेहद कम लगती है। इससे सिलाई में मुनाफा ज्यादा है, साथ ही कपड़े की दुकान होने से वह अतिरिक्त लाभ कमा रही हैं। बिहान से जुड़कर उन्हे अपने लिए कुछ करने की चाह जगी और आज वह लखपति दीदी की श्रेणी में आ गई हैं। आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनकर उनका सामाजिक और पारिवारिक सम्मान भी बढ़ा है।