’सेवा की कहानी’ : प्रधानमंत्री आवास से बदली आदिवासी अर्जुन की सामाजिक स्थिति
कोरिया । दूसरे के खेतों में परिश्रम करके आजीविका चलाने वाले श्रमिक परिवार के लिए प्रधानमंत्री आवास एक सामाजिक बदलाव की पहचान बन गया है। कोरिया जिले के ग्राम पंचायत उमझर में रहने वाले आदिवासी परिवार के मुखिया कृषक अर्जुन और उनकी पत्नी दूसरे के खेतों में परिश्रम से अपनी आजीविका चलाते हैं। अब उनके लिए प्रधानमंत्री आवास ने सामाजिक बदलाव के साथ सुरक्षित जीवन का माध्यम बना दिया है। अब उनका परिवार बिना किसी मौसम की चिंता के सुखद जीवन जीने लगा है।
पारिवारिक स्थिति
अनुसूचित जनजातीय समाज से आने वाले अर्जुन के पास बेहद थोड़ी सी कृषि भूमि है जिस पर वह वर्षा आधारित धान की फसल लेते हैं। इसके अलावा उनके पास आजीविका के लिए दूसरे के खेतों में परिश्रम, गांव में पषुओं को चराना या फिर अकुषल रोजगारमूलक योजनाओं का ही सहारा है। ऐसी सीमित आय के बीच उनके लिए पक्के मकान का निर्माण करना एक कठिन चुनौती थी। उनकी आजीविका से आय केवल इतनी ही होती थी कि वह अपना जीवन निर्वाह कर सकें।
आवास से संबल
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण ने लाखों परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव किया है। ऐसे ही बैकुण्ठपुर जनपद के ग्राम उमझर में रहने वाले आदिवासी श्रमिक अर्जुन के लिए भी पक्के मकान की सुविधा ने इस गरीब परिवार को सामाजिक और आर्थिक चुनौनियों से निपटने का सहारा दिया है। पहले कच्चे मकान में बारिश और ठंड के मौसम मे होने वाली परेशानियों से यह दंपत्ति हमेशा संघर्ष करते रहते थे। लेकिन आवास निर्माण के बाद उनकी प्रमुख समस्या का निराकरण हो गया है।
सामाजिक पहचान बना आवास
अर्जुन आदिवासी परिवार से आते हैं और हमेशा दूसरे के खेतों में परिश्रम करने के लिए निकल जाते हैं। ऐसे में उनकी पत्नी सुखमन ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने पक्के मकान से सामाजिक पहचान बनी है। पहले कच्चे मकान में रहने का कष्ट शब्दों में नहीं बता सकते। जब से आवास का निर्माण पूरा हो गया है तब से दोनों बच्चियों के सुरक्षा का संकट भी समाप्त हो गया है।