छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

दूषित हैंडपंप का पानी पीने मजबूर ग्रामीण, संक्रमण का मंडरा रहा खतरा

दूषित हैंडपंप का पानी पीने मजबूर ग्रामीण, संक्रमण का मंडरा रहा खतरा

ग्राम पंचायत उदका में पेयजल व्यवस्था पर सवाल, ग्रामीणों ने बीमारी फैलने की जताई आशंका

कवर्धा -:   कबीरधाम जिले के यह मामला जनपद पंचायत पंडरिया के  ग्राम पंचायत उदका में ग्रामीणों को इन दिनों स्वच्छ पेयजल के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव में लगे हैंडपंप से कथित तौर पर दूषित एवं अस्वच्छ पानी निकलने के बावजूद ग्रामीणों को मजबूरी में इसी पानी का उपयोग करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल का कोई समुचित वैकल्पिक इंतजाम नहीं होने के कारण रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इसी हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार हैंडपंप से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है। पानी की स्थिति देखकर ग्रामीणों में संक्रमणजनित बीमारी फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील लोगों के स्वास्थ्य को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं।

दूषित पानी से बीमारी का खतरा

गंदे या दूषित पेयजल के सेवन से विभिन्न प्रकार की जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या सामने आने के बावजूद जिम्मेदार विभाग द्वारा पानी की गुणवत्ता की जांच एवं आवश्यक सुधार की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। यदि समय रहते पानी की जांच नहीं कराई गई और हैंडपंप की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो स्थिति गंभीर रूप ले सकती है।

ग्रामीणों ने की पानी की जांच और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग

ग्रामीणों ने संबंधित पंचायत सरपंच सचिव एवं विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि हैंडपंप के पानी का तत्काल प्रयोगशाला परीक्षण कराया जाए। साथ ही जब तक पानी पीने योग्य होने की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक गांव में स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। हैंडपंप की तकनीकी जांच कर आसपास के जलस्रोतों की स्थिति का भी निरीक्षण किए जाने की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना मूलभूत सुविधा का हिस्सा है। ऐसे में यदि ग्रामीणों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि किसी भी प्रकार की संक्रमणजनित बीमारी फैलने से पहले समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।

ग्रामीणों की मांग:

हैंडपंप के पानी की तत्काल लैब जांच हो।
दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
जांच तक स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
संबंधित विभाग द्वारा गांव का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

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