भक्ति से सराबोर हुई चैत्य परिपाटी,चार जिनालयों में गूंजे जिनेंद्र देव के जयकारे*
रायपुर |
2026-09-28 15:27:57
*परमात्मा के दर्शन- चैत्यवंदन कर समाजजनों ने लिया धर्मलाभ*
रायपुर। विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास के तहत रविवार को धर्म, भक्ति और आत्मसाधना का अनुपम संगम देखने को मिला। परम पूज्य मुनिश्री संवेगरत्न सागरजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में सुबह चैत्य परिपाटी निकाली गई। बैंड-बाजों के साथ निकली धर्मयात्रा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए। चार जिनालयों में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने जिनेंद्र देव के दर्शन, चैत्य वंदन और पूजन कर आध्यात्मिक लाभ अर्जित किया।
सुबह 5.30 बजे श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय से शुरू हुई चैत्य परिपाटी सबसे पहले विवेकानंद नगर स्थित श्री संभवनाथ जिनालय पहुंची। यहां भक्तांबर पाठ, दर्शन और चैत्य वंदन किया गया। इसके बाद सभी टैगोर नगर स्थित अलौकिक श्री पार्श्वनाथ जिनालय पहुंचे। मुनिभगवंतों के साथ श्रद्धालुओं ने यहां भी विधि-विधान से दर्शन और वंदन किया।
इसके बाद श्रद्धालु राजेंद्र नगर स्थित श्री महावीर स्वामी जिनालय और मुनिसुब्रत स्वामी जिनालय नवकार नगर पहुंचे। चारों जिनालयों में जिनेंद्र देव के जयकारों और भक्ति गीतों से वातावरण धर्ममय हो गया। श्रद्धालुओं के चेहरे पर भक्ति और आस्था का भाव नजर आया।
*राजेंद्र नगर जिनालय में भव्य संवेदना कार्यक्रम*
राजेंद्र नगर जिनालय में मुंबई से आए गीत एवं संगीतकारों ने भव्य संवेदना कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। भक्ति गीतों से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। इस दौरान नवकारसी एवं साधार्मिक वात्सल्य का भी आयोजन किया गया, जिसमें समाजजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
*शिविर में जगाई जा रही बच्चों में संस्कारों की ज्योति*
वर्षावास के अंतर्गत प्रति रविवार दोपहर 3 बजे विवेकानंद नगर में बालक-बालिकाओं के लिए विशेष संस्कार शिविर आयोजित किया जा रहा है। शिविर में बच्चों को धर्म, संस्कार और परमात्मा के सिद्धांतों से परिचित कराया जा रहा है। बच्चों में धार्मिक संस्कारों की नींव मजबूत करने और उन्हें भारतीय संस्कृति एवं जैन दर्शन से जोड़ने के उद्देश्य से इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया एवं महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि रविवार को सुबह श्री संभवनाथ जिनालय में गुरु इकतीसा पाठ और पार्श्वनाथ भगवान का स्तवन किया गया। इसके बाद चैत्य परिपाटी सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए। दिनभर उपाश्रय और जिनालयों में भक्ति, साधना और धर्म के वातावरण में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। साथ ही ‘द लिगेसी ऑफ महावीर’ थीम पर आयोजित झांकियों के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।