पंडरिया/कवर्धा--अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी तुलस राम चंद्राकर, व्याख्याता एवं श्रीमती यक्ष चंद्राकर, शिक्षिका द्वारा ग्राम महली में वृद्धजन सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर ग्राम के 21 वृद्धजनों को श्रीफल एवं साल भेंट कर सम्मानित किया गया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। परिवार के सभी सदस्यों के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम बुजुर्गों के प्रति सम्मान और संस्कार का सुंदर उदाहरण बना।
समाजसेवा बनी व्यक्तित्व की पहचान
तुलस राम चंद्राकर शिक्षा सेवा के साथ लंबे समय से समाजसेवा में भी सक्रिय हैं। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के बीच उनके शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यों ने उनकी अलग पहचान बनाई है। शिक्षा के क्षेत्र में जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए किए गए कार्यों और नवाचारों के लिए उन्हें राज्यपाल पुरस्कार सहित विभिन्न सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
समाजसेवा के क्षेत्र में वे वृद्धजन, महिला एवं दिव्यांग सम्मान जैसे आयोजनों के साथ निरंतर जुड़े रहे हैं। वहीं जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष प्राथमिकता देते हुए पौधरोपण, पौधों के संरक्षण तथा जल संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाते रहे हैं।
बुजुर्गों का आशीर्वाद सबसे बड़ी पूंजी
इस अवसर पर तुलस राम चंद्राकर ने कहा कि “बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनका अनुभव, संस्कार और आशीर्वाद मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा और पूंजी है। इनके आशीर्वाद से ही मुझे शिक्षा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य करने की शक्ति मिलती है। मेरा प्रयास है कि जीवनभर शिक्षा, समाजसेवा, पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर योगदान देता रहूं।”
ग्रामवासियों ने शिक्षक दम्पत्ति की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सेवा, सम्मान और संस्कार के कार्यों के कारण तुलस राम चंद्राकर ने समाज के विभिन्न वर्गों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।