छत्तीसगढ़ / राजनांदगांव

इंदिरा एकादशी

 इंदिरा एकादशी अश्वनी मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है , जो पितृ पक्ष श्राद्ध के अवसर पर आति है धार्मिक दृष्टिकोणों से इसका विशेष महत्व है क्योंकि यह व़त मुख्य रुप से पितरों को । पूर्वजों। की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए रखा जाता है । अखिल भारतीय पुजारी पुरोहित संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवकुमार निर्वाणी ने बताया धार्मिक महत्व और लाभ , पितरों को मोक्ष ,ऐसी मान्यता है कि यदि कोई पूर्वज जाने अंजाने में हुई पापोके कारण यमलोक नर्क में कष्ट भोग रहा हैतो इंदिरा एकादशी के व़त के पुन्य को उनके ।पीड़ित । के नाम से दान करने पर पीड़ितों की तत्काल मुक्ति हो जाती हैं ऐसी पोराणीक मान्यता है कि सतयुग में महिष्मतिपुरि के परम प्रतापी राजा इनद़सेन भगवान विष्णु के परम भक्त थे एक दिन देवर्षि नारदजी उनके दरबार में आये और बताया कि वे यमलोक गये थे यहां राजा के पिता को यमराज की सभा में देखा। राजा के पिता ने संदेश भेजा था कि पूर्व जन्म में एकादशी व्रत भंग होने के दोष के कारण वे यमलोक का कष्ट भोग रहे  नारद जी के कहे अनुसार राजा इंद्रसेन ने अपनी रानियां और बन्धुओं सहित अश्वनी कृष्ण की इंदिरा एकादशी का विधिवत् व्रत रखकर उसका पुण्य अपने। पिता को अर्पित कर दिया इस व्रत के प्रभाव से राजा के पिता को यमलोक  की  कष्ट से मुक्ति प्राप्त हो गई तथा गरुड़ पर सवार होकर विष्णु लोग को प्राप्त हुई। इंदिरा एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा के पिता की मुक्ति हो गई उक्त जानकारी अखिलभारतीय पुजारी पुरोहित संघ के कार्यालय प्रमुख वैभव निर्वाणी अभिषेक चौबे एवं आकाश शर्मा ने संयुक्त रूप से दी

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