छत्तीसगढ़ / रायपुर

पितृ पक्ष केवल अनुष्ठान नहीं कृतज्ञता का पर्व : संत राजीवलोचनदास

 रायपुर । कान्यकुब्ज सभा एवं शिक्षा मंडल के तत्त्वावधान में पितृ मोक्ष अमावस्या के पवित्र अवसर पर एक भावपूर्ण एवं भव्य सामूहिक श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वजनों एवं समाजसेवियों ने उपस्थिति दर्ज कराकर इस लोक से गमन कर चुकीं दिव्य आत्माओं के प्रति अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

समारोह के मुख्य वक्ता संत राजीवलोचनदास महाराज रहे। अपने ओजस्वी एवं सारगर्भित संबोधन में उन्होंने सनातन संस्कृति में पितृ पक्ष के महात्म्य, उसकी शास्त्रीय प्रक्रिया एवं सामाजिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

संत राजीवलोचनदास ने कहा कि पितृ पक्ष हमारी सनातन परंपरा का वह स्वर्णिम स्तंभ है जो हमें अपने पूर्वजों और उनकी महान परंपराओं से जोड़ता है। उन्होंने कहा, "पितरों का स्मरण करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि उन पूर्वजों के प्रति हमारी अनन्य कृतज्ञता और निष्ठा का प्रकटीकरण है, जिनके संस्कारों और परिश्रम की बदौलत आज हम स्थापित हैं।"

 
 
 
 
 
 
 
 
 



महाराज जी ने पितृ मोक्ष अमावस्या पर किए जाने वाले तर्पण, दान एवं पिंडदान की शास्त्रीय विधि और उसके गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ को बहुत ही सरल एवं सुगम शैली में समझाया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह का आह्वान किया कि अपने दिवंगत पूर्वजों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उनके बताए उच्च आदर्शों, समाज सेवा और नैतिक मूल्यों का निष्ठापूर्वक पालन कर

कार्यक्रम के आरंभ में अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, उपाध्यक्ष संजय अवस्थी एवं सचिव राजकुमार दीक्षित ने आयोजन के उद्देश्य और समाज के लिए किए जा रहे सेवा कार्यों की विस्तृत जानकारी दी इस दौरान प्रभारी गिरजा शंकर दीक्षित, प्रमोद कुमार मिश्रा, जयशंकर तिवारी एवं श्रीकांत अवस्थी और संस्था के पदाधिकारियों सदस्यों ने मुख्य अतिथि राजीव लोचन दास का शाल श्रीफल से अभिनंदन किया तत्पश्चात सह सचिव अनुराग पांडे एवं पूर्व पदाधिकारियों के द्वारा दिवंगत पूर्व अध्यक्षों की तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया। इस प्रकार के आयोजन को प्रतिवर्ष निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि परिवारजनों एवं समाज के सहयोग से दिवंगत आत्माओं के प्रति सच्ची श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने की यह परंपरा आगे भी जारी रखी जाएगी।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 



सह सचिव प्रमोद मिश्रा के द्वार आभार व्यक्त करते हुए सामूहिक रूप से दो मिनट का मौन धारण कर सभी दिवंगत आत्माओं की चिर शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। वक्ताओं ने कान्यकुब्ज सभा एवं शिक्षा मंडल के इस सामूहिक आयोजन की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि व्यक्तिगत वेदनाओं से ऊपर उठकर समाज को एक सूत्र में बांधने और सामूहिक रूप से पूर्वजों को नमन करने का यह प्रयास अत्यंत अनुकरणीय एवं वंदनीय है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 



ऐसे आयोजन समाज की एकता, सांस्कृतिक विरासत और पारिवारिक संस्कारों को सुदृढ़ करते हैं। साथ ही, दिवंगत सदस्यों के शोकसंतप्त परिजनों को यह विश्वास भी दिलाते हैं कि दुख की घड़ी में पूरा समाज उनके साथ खड़ा है। पूर्वजों के प्रति सम्मान और स्मरण की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों में भी संस्कार, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना जागृत करती रहेगी।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 



अंत में ईश्वर से प्रार्थना की गई कि वे समस्त दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा उनके परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति दें।

आज के श्रद्धांजलि सभा में समाज के अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, सचिव राजकुमार दीक्षित, कोषाध्यक्ष शरद शुक्ला, उपाध्यक्ष संजय अवस्थी, सह-सचिव द्वय प्रमोद कुमार मिश्रा, अनुराग पाण्डेय, पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक वीरेंद्र पाण्डेय, पूर्व अध्यक्ष अरुण शुक्ल, पूर्व सचिव राघवेंद्र मिश्रा, कार्यक्रम प्रभारी गिरजा शंकर दीक्षित, कार्यक्रम सह-प्रभारी जयशंकर तिवारी, प्रकाश अवस्थी, श्रीकांत अवस्थी, संजय अवस्थी(गीता नगर), विकास तिवारी, अशोक दीक्षित, गौरव शुक्ला, श्रीमती सुधा शुक्ला, श्रीमती आभा बाजपेई, श्रीमती शकुंतला तिवारी, श्रीमती उमा शुक्ला, राघवेंद्र पाठक, लखनलाल बाजपेई, रज्जन अग्निहोत्री, इंद्र कुमार तिवारी, आशुतोष द्विवेदी, रविंद्र मिश्रा, प्रभात पाण्डेय, अमित बाजपेई, राकेश तिवारी, संतोष तिवारी,  शिवराम अवस्थी,  अनिल शुक्ला, जे. पी. मिश्रा आर. के. दीक्षित,   विकास शुक्ला, राजेश त्रिवेदी, सत्यदेव तिवारी,  संदीप शुक्ला, अभिषेक मिश्रा सहित बड़ी संख्या में दिवंगत सदस्यों के परिजन एवं समाज के लोग तथा मातृशक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित थीं।

 

Leave Your Comment

Click to reload image