* *कांग्रेस की 7 सदस्यीय जांच टीम ने किया नंदनी कुमान गांव व स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण** -नंदनी कुमान में कुपोषण से 5 बच्चों की मौत का मामला-
कबीरधाम |
2026-10-24 17:35:45
कवर्धा-छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर कवर्धा जिले के सुदूर वनांचल एवं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में कुपोषण की स्थिति की वास्तविकता जानने हेतु कांग्रेस द्वारा 7 सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था।
मोहला-मानपुर विधायक एवं जांच दल के अध्यक्ष इंद्रशाह मंडावी के नेतृत्व में कांग्रेस की टीम ने बोड़ला स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर भर्ती कुपोषित बच्चों एवं उनके परिजनों से मुलाकात की तथा इसके बाद सुदूर वनांचल ग्राम नंदनी कुमान (झलमला-रेंगाखार क्षेत्र) पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिलकर जमीनी स्थिति का निरीक्षण किया।
जांच के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि पिछले चार महीनों में एक ही गांव के 5 बच्चों की मौत हो चुकी है। 12 बच्चे वर्तमान में बोड़ला अस्पताल में उपचाररत हैं, जबकि 2 बच्चों की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में अभी भी करीब 10 बच्चे कुपोषण से प्रभावित हैं।
मोहला-मानपुर विधायक एवं जांच दल के अध्यक्ष इंद्रशाह मंडावी ने कहा कि कवर्धा जिले के बैगा आदिवासी समुदाय के बच्चों की कुपोषण से मौत बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह और भी गंभीर विषय है कि इतनी भयावह स्थिति के बावजूद क्षेत्रीय विधायक एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तथा सांसद संतोष पांडे अब तक पीड़ित परिवारों के बीच नहीं पहुंचे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा विशेष रूप से संरक्षित जनजातीय समुदाय के बच्चों की ऐसी स्थिति सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की जमीनी व्यवस्था कमजोर है और जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठकर कागजी खानापूर्ति करने में लगे हुए हैं।
भानुप्रतापपुर विधायक श्रीमती सावित्री मनोज मंडावी ने कहा कि आदिवासी परिवारों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासी बच्चों का कुपोषण से प्रभावित होना और उनकी मौत होना बेहद गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में कुपोषण के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर स्थिति में सुधार किया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में वनांचल क्षेत्रों की स्थिति चिंताजनक दिखाई दे रही है।
आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष जनक ध्रुव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा आदिवासी एवं कमजोर वर्गों के लिए स्वास्थ्य, पोषण एवं महिला एवं बाल विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब योजनाओं के लिए बजट उपलब्ध है, तो फिर नंदनी कुमान जैसे गांवों में बच्चों तक इसका लाभ क्यों नहीं पहुंच रहा है स्वास्थ्य केंद्र एवं गांव में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं, बच्चों की स्थिति तथा पोषण व्यवस्था का जायजा लिया। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, नियमित जांच एवं उपचार व्यवस्था को लेकर भी गंभीर शिकायतें जांच दल के समक्ष रखीं।
जिला कांग्रेस कमेटी कबीरधाम के अध्यक्ष नवीन जायसवाल ने कहा कि नंदनी कुमान में 5 बच्चों की मौत, 14 बच्चों का अस्पताल में भर्ती होना और गांव में अभी भी कई बच्चों का कुपोषण से प्रभावित होना बेहद गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय विधायक स्वयं प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं, इसके बावजूद पीड़ित परिवारों तक पहुंचकर उनकी पीड़ा जानने का समय नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक प्रचार और दावों से बाहर निकलकर वनांचल की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी तय कर हर बच्चे की स्वास्थ्य जांच, उचित उपचार, पोषण आहार और आवश्यक चिकित्सा सुविधा तत्काल उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
कांग्रेस ने मांग की है कि नंदनी कुमान में हुई बच्चों की मौतों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस की 7 सदस्यीय जांच टीम में मोहला-मानपुर विधायक इंद्रशाह मंडावी, भानुप्रतापपुर विधायक श्रीमती सावित्री मनोज मंडावी, बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव, डोंगरगढ़ विधायक श्रीमती हर्षिता बघेल एवं पूर्व विधायक श्रीमती ममता चंद्राकर सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शामिल रहे।
इस दौरान जिला एवं क्षेत्रीय कांग्रेस संगठन से गोपाल चंद्रवंशी, , प्रभाती मरकाम, , मेहुल सत्यवंशी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कांग्रेस ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा यह मामला केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सरकार की जवाबदेही का विषय है। बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और उपचार उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।