सुरक्षित बचपन अभियान के दूसरे दिन छह स्कूलों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश खिलावन राम रिगरी ने बच्चों को बताया अधिकारों का महत्व, सुरक्षित बचपन के लिए किया प्रेरित
कोण्डागांव, 27 अक्टूबर 2026
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर* के दिशा-निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोंडागांव के तत्वावधान में संचालित ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के दूसरे दिन जिले के छह विद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों, बाल संरक्षण एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।
स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जामकोटपारा, कोंडागांव में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री खिलावन राम रिगरी ने शिविर के दौरान बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और प्रत्येक बच्चे को भयमुक्त, सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए तथा किसी भी प्रकार की हिंसा, शोषण, दुर्व्यवहार या अनुचित व्यवहार का सामना करने पर चुप नहीं रहना चाहिए। अपनी समस्या अभिभावकों, शिक्षकों अथवा विश्वसनीय व्यक्तियों को बताकर समय पर सहायता प्राप्त करनी चाहिए। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार, आत्मविश्वास और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित किया।
इसी क्रम में स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, तहसीलपारा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, संबलपुर, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कोंडागांव, स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश/हिंदी मीडियम स्कूल, दहिकोंगा तथा स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बम्हनी में भी विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए।
इन कार्यक्रमों में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री विक्रम प्रताप चंद्रा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी पॉक्सो) सुश्री प्रतिभा मरकाम , मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती रेशमा बैरागी पटेल , जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुश्री गायत्री साय तथा प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी सुश्री सीमा टांडे सहित पैनल अधिवक्ताओं एवं अभियान के तहत गठित टीम ने सहभागिता निभाई।
शिविरों के माध्यम से बच्चों को बाल अधिकारों, सुरक्षा, शोषण से बचाव तथा अपनी समस्याओं के संबंध में सहायता प्राप्त करने के प्रति जागरूक किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की यह पहल बच्चों के अधिकारों के संरक्षण एवं सुरक्षित बचपन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।