पुलिस को संयम से काम लेेने की जरूरत है
किसी भी शहर में,जिले में,प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम है।जनता उससे अपेक्षा करती है कि जो कानूनन उसका काम है, वह काम वह करे, वह काम तो न करे जिसकी इजाजत कानून नहीं देता है। पुलिस बदनाम है तो इसलिए है कि वह अपनी सीमा से बाहर जाकर बहुत कुछ करती है, कई बार वह गलत नहीं भी करती है तो उसकी पुरानी मारपीट करने वाली छवि के कारण मान लिया जाता है कि पुलिस ने किया है तो कुछ तो गलत जरूर किया होगा।उसका काम कानून के अनुसार काम करना है, कानून हाथ में लेकर काम नहीं करना है।
आम लोग तो यही चाहते हैं कि पुलिस छवि रक्षक की होनी चाहिए, लेकिन पुलिस के आए दिन जो कारनामें सामने आते हैं, उससे तो लगता है कि पुलिस खुद ही नहीं चाहती है कि उसकी छवि जनता के रक्षक की बने।पुलिस किसी को पूछताछ के लिए थाने लेकर आई है तो उसके साथ मारपीट तो वह कानूनन नहीं कर सकती लेकिन भुक्तभोगी तो यही बताते व प्रचार करते हैं कि आप किसी भी वजह से थाने लाए गए मतलब आपके साथ मारपीट करना पुलिस अपना हक समझती है। किसी परिवार के सदस्यों को किसी अपराध के मामले में पूछताछ के लिए लेकर आएं हैं तो पूछताछ करिए,पूछताछ करने की जगह मारपीट करने को कोई भी सही नहीं कह सकता।
यही वजह है कि बलरामपुर में एनआरएचएम के प्यून गुरुचरण मंडल की थाने में आत्महत्या मामले में पुलिस कह रही है कि गुरुचरण के साथ कोई मारपीट नहीं की गई है, लेकिन पुलिस की बात पर वहां के लोग यकीन नहीं कर रहे हैं।लोगों का कहना है गुरुचरण मंडल और उसके पिता को गुरुचरण की पत्नी के लापता होने के मामले में पूछताछ के लिए थाने लाया गया था, उनको चार दिन थाने में रखा गया और उनकी पिटाई की गई। गुरुचरण के पिता के पुलिस से कई सवाल हैं, उनका जवाब पुलिस को देना चाहिए।
इन्हीं सवालों को लेकर लोगों में गुस्सा है। पुलिस को लेकर लोगों में गुस्सा तो होता है, लेकिन जब पुलिस मारपीट में कोई मर जाता है तो लोगों में गुस्सा बढना स्वाभाविक है, लोग अपनी बातों से इसे जाहिर भी करते हैं। लेकिन पुलिस पर भीड़ का हमला,किसी के घर में भीड़ का आग लगा देना ऐसी घटनाएं है जो पहले छत्तीसगढ़ में नहीं होती थी, कम से कम वर्तमान मेें जिस तरह से एक के बाद एक घटना में भीड़ हिंसक व्यवहार कर रही है,वैसा तो यहां के लोग करते नहीं थे, यहां के लोगों में पुलिस के प्रति नाराजगी तो होती है लेकिन पुलिस पर हमला यहां के लोगों का स्वभाव नहीं रहा है।
एक घटना में ऐसा होता तो समझ आता कि ऐसा अचानक हो गया है,अब तो एक के बाद एक घटना में भीड़ हिंसा कर रही है, पुलिस पर हमले कर रही है। आग लगा रही है।यह राज्य के लोगों के साथ ही, राज्य सरकार व पुलिस के लिए चिंता की बात होनी चाहिए।इससे पुलिस की पहले से खराब छवि और खराब हो रही है। अपराधियों में उसका खौफ तो पहले से ही कम हो गया है, उस पर हमले होते हैं तो अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं,उनको लगता है कि पुलिस पर हमला किया जा सकता है। पुलिस को डराया जा सकता है।
अगर इसके पीछे कोई राजनीतिक संगठन है तो यह बहुत ही बुरी बात है कि भीड़ का इस्तेमाल कर अपना राजनीतिक स्वार्थ साध रही है। यह भी संभव है कि एक जगह भीड़ के व्यवहार से दूसरी जगह भीड़ प्रेरणा ले रही हो कि वहां भीड़ ऐसा कर सकती है तो हम भी यहां ऐसा कर सकते हैं।भीड़ की हिंसा का कारण जो भी हो, सरकार और पुलिस को अब सजग हो जाना चाहिए कि ऐसी घटनाएं एक के बाद होती रहेंगी तो आज जो लोग नहीं मान रहे हैं कि भाजपा सरकार के समय कानून व्यवस्था का बुरा हाल नहीं है, वह भी एक दिन मानने लगेंगे यदि ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगी।