सामान्य ज्ञान

31 लाख से 53 लाख सदस्य मतलब रिकार्ड बन गया

किसी भी राजनीतिक दल के बड़े व राष्ट्रीय होने का पता इस बात से चलता है कि उसके किस राज्य में कितने सदस्य हैं।देश के ज्यादातर राजनीतिक दल तो अपनी सदस्य संख्या नहीं बताते हैं। ताकि लोगों की पता न चले कि यह दल कितना बड़ा है।देश के ज्यादातर दल परिवारवादी दल होते हैं, इसलिए वह एक राज्य तक ही खुश रहते हैं,उनके लिए एक राज्य में जितने भी सदस्य बने हैं, या बनाए गए है, वह उससे खुश रहते हैं, ज्यादातर परिवारवादी दल तो चाहते ही नहीं है कि उनकी सदस्य संख्या बहुत ज्यादा बढ़े क्योंकि ज्यादा सदस्य संख्या होगी तो पार्टी के भीतर परिवार के खिलाफ भी कोई आवाज उठा सकता है। वह परिवारहित की जगह पार्टी हित की बात कर सकता है, जैसा कांग्रेस में हुआ जिन जिन लोगों ने कांग्रेस में गांधी परिवार के हित की जगह पार्टी हित की बात, उनको पार्टी छोड़ने को मजबूर कर दिया गया या उन लोगों ने पार्टी छोड़ दी।

परिवारवादी दल अपनी सदस्य कम रखना चाहते हैं,ताकि जो भी पार्टी में है वह परिवार की बात माने, पार्टी की चिंता मत करे, पार्टी तो परिवार की है,वह अपनी पार्टी की चिंता कर लेगी।पार्टी की सदस्य संख्या से पता चलता है कि पार्टी के सदस्य पहले कितने थे,अब कितने हैं, कितने नए सदस्य बने हैं किस राज्य में पार्टी के ज्यादा सदस्य है,सदस्यता अभियान से ही पता चलता है पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों की कदर करती है, पहले सदस्य बनाती है, फिर वह चुनाव कराती है और पूरे देश में संगठन का नया ढांचा होता है, ज्यादातर राजनीतिक दल यह करते नहीं है, क्योंकि उनकी पार्टी में परिवार की तानाशाही चलती है, अध्यक्ष का चुनाव भी होगा तो पहले बता दिया जाएगा कि अध्यक्ष फलाने को ही चुनना है। यानी अध्यक्ष परिवार से अलग होगा वह परिवार की पसंद होगा।

देश में संभवतः भाजपा ही एक ऐसी पार्टी रह गई है तो सदस्यता अभियान चलाती है, सारे लोग फिर से सदस्य बनते हैं, नए लोगों को भी सदस्य बनाया जाता है। पुराने लोगों को हर राज्य में लक्ष्य दिया जाता है कि राज्य में भाजपा के इतने सदस्य होने चाहिए।भाजपा ने छत्तीसगढ़ में सदस्यता अभियान चलाया और उसने नया इतिहास रच दिया है। उसके ५३ लाख सदस्य बन चुके हैं, यह ३१ लाख से लगभग दुगुना है,छत्तीसगढ़ भाजपा को पहले पचास लाख का लक्ष्य दिया गया था, फिर बाद में लक्ष्य बढ़ाकर साठ लाख कर दिया गया।भाजपा को छत्तीसगढ़ में बहुत बड़ा लक्ष्य दिया गया था, वह आंकड़ों के हिसाब से तो लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकी लेकिन ५३लाख सदस्य बनाना भी बहुत बड़ी बात है, यह बड़े से बड़े नेता और छोटे से छोटे से नेता की मेहनत का परिणाम है।

 
 

इस बार राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को दस करोड़ नए सदस्य जोडने़ है, इसमें छत्तीसगढ़ का योगदान ५३ लाख का है। दावा किया जाता है कि भाजपा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है, यदि वह दस करोड़ नए सदस्य जोड़ने में सफल हो जाती है तो उसकी सदस्य संख्या बढ़कर १८ करो़ड़ से २८ करोड़ हो जाएगी।चुनाव जीतने में पार्टी के सदस्यों की भूमिका भी अहम होती है क्योंकि पार्टी के जितने ज्यादा सदस्य होते है, प्रचार अभियान कहीं भी चलाने में कोई दिक्कत नहीं होती है,कम समय में काम किया जा सकता है। पार्टी की बात जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचाई जा सकती है। दूसरे राजनीतिक दलों व भाजपा में यही बडी़ फर्क है कि भाजपा का संगठन निचले स्तर पर जितना विशाल है, ऊपरी स्तर पर उतना ही अऩुशासित। पार्टी ने एक बार फैसला कर लिया मतलब होता है कि उसे पार्टी के लिए मानना जरूरी है। 

 
 

पार्टी का जितना विशाल ढांचा होता है वह देश के किसी गांव की खबर भी भाजपा मुख्यालय जल्द से जल्द पहुंचा सकता है। यानी चाहे ऊपर से नीचे खबर भिजवाना हो या नीचे से ऊपर कोई खबर भिजवानी हो भाजपा में इस काम में वक्त नहीं लगता है, इसलिए पार्टी हमेेशा अपडेट रहती है।इसके अलावा मोदी भी अपने कार्यकर्ताओं व नेताओं से इसी तरह जुड़े रहते हैं फीड बैक लेते रहते हैं। भाजपा में कई स्तरों पर नेटवर्क है, एक भाजपा संगठन का है, एक पीएम मोदी का है, एक आरएसएस का है। इसलिए कोई भी निर्णय लेना हो भाजपा तुरंत ले पाती है और हमेशा दूसरे दलों से आगे रहती है।संगठन मजबूत हो तो चुनाव जीतना भी तो आसान होता है,दूसरे राजनीतिक दल चुनाव हारते इसलिए भी है कि उनका संगठन जमीनी स्तर पर कमजोर रहता है और वह उसे मजबूत करना ही नहीं चाहते हैं। इस आधार पर कहा जा सकता है कि भाजपा संगठन की मजबूती जितना ध्यान देती है दूसरे राजनीतिक दल नहीं देते हैं।

 

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