जरा सी चूक हुई और हो गए 8 जवान शहीद
छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलियों के सफाए में लगी हुई है, आए दिन आपरेशन चलाकर नक्सलियों का सफाया किया जा रहा है।बस्तर में नक्सलियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है,बस्तर में नक्सलियों की संख्या मारकर,गिरफ्तार कर, सरेंडर करा कर कम की जा रही है।आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल ही २३१ नक्सली मारे गए हैं,७३६ नक्सलियों ने सरेंडर किया है और ८०० से ज्यादा नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं। इस दौरान नक्सलियों के १४ लीडर भी मारे गए हैं। यानी साय सरकार ने नक्सली सफाए के अभियान को इस आधार पर सफल कहा जा सकता है,साय सरकार ने साल के समय में ही १७०० से ज्यादा नक्सली बस्तर में कम कर दिए हैं।ऐसा आज तक कोई सरकार नहींं कर सकी है।यह साय सरकार की बड़ी उपलब्धि है। दो साल तक नक्सली सुरक्षा बल के जवानों पर कोई बड़ा हमला नहीं कर सके,यह भी सुरक्षा बलों व सरकार की बड़ी सफलता है।
नक्सली दो साल तक सुरक्षा बलों पर कोई बड़ा हमला नहीं कर सके तो इसका कारण यह था कि सुरक्षा बलों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा गया था, सुरक्षा बलों की सुरक्षा में कोई चूक नहीं की गई थी। दो साल बाद छह जनवरी को नक्सली जवानों पर बड़ा हमला करने में सफल हो गए तो उसकी वजह यह है कि सुरक्षा बलों की सुरक्षा में कहीं पर चूक हो गई और इसका फायदा नक्सलियों ने उठाया।नारायणपुर में मुठभेड़ में पांच नक्सलियों को ढेर कर लौट रहे सुरक्षा बलों के काफिले पर बीजापुर जिले में बारूदी सुरंग विस्फोट कर एक वाहन को उडा़ दिया. उस वाहन में आठ जवान थे,वह शहीद हो गए और कारचालक भी मारा गया।
दो सालों में यह सुरक्षा बलों पर नक्सलियों का बड़ा हमला है, यह हमला कर नक्सलियों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि बस्तर में अभी हम हैं, हम अभी भी कहीं भी कभी भी सुरक्षा बलों पर हमला कर सकते हैं,बस्तर में बहुत सारे कैंप खुल जाने के बाद भी हम सुरक्षा जवानों के वाहन को बारूदी सुरंग कर उड़ा सकते हैं।दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि सुरक्षा बलों की सुरक्षा में दो साल बाद एक दिन चूक हुई और इस चूक का फायदा उठाकर नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया और आठ जवान शहीद हो गए.यह बड़ा नुकसान है।बताया जाता है कि सुरक्षा बलों की सुरक्षा के लिए सड़क के दोनों तरफ आरओपी लगाई जाती है,इस बार एक ही तरफ लगाई गई थी,इस चूक का नक्सलियों ने फायदा उठाया। बताया जाता है कि जवान पुलिया पर दो पहर सवा दो बजे और आरओपी उनसे एक घंटा पहले मौके पर पहुंची थी जबकि नक्सली सुबह ही पहुंच कर पूरी तैयारी कर चुके थे। जवानों के वाहन पुलिया पर पहुंचे तो आठवीं गाड़ी को नक्सलियों ने उ़ड़ा दिया। इस गाड़ी में मौजूद आठ जवान मौके पर शहीद हो गए।
शुक्र है कि इस दौरान मौके पर बड़ी संख्या में नक्सली नहीं थे नहीं तो नुकसान और बड़ा हो सकता था।पहले इस तरह की घटना होती थी तो मौके पर मौजूद नक्सली जवानों का हथियार लूट कर ले जाते थे, इस बार संख्या कम होने के कारण नक्सली ऐसा नहीं कर सके। बताया जाता है कि सुरक्षा बलों को इस तरह के बड़े हमले से बचाने के लिए कहा गया था कि वह जब नक्सलियों के सफाए के अभियान में निकलें तो चार पहिया वाहनों का उपयोग न करें। पैदल जाएं या दो पहिया से जाएं। पैदल लौटें या बाइक पर लौटें।ताकि नक्सली बदला लेने के लिए कहीं पर विस्फोट करें तो ज्यादा जवान शहीद न हो। बताया जाता है कि दो साल तक इस नियम का पालन किया गया तो नक्सली कोई बड़ा हमला नहीं कर सके। नक्सली तब ही बारूदी सुरंग विस्फोट करते हैं जब जवान किसी वाहन में होते हैं।दो साल पहले अरनपुर में भी इसी तरह की वारदात को अंजाम दिया गया था।तब १० जवान व वाहन चालक मारा गए थे।
इस घटना से सबक लिया था सुरक्षा बलों ने तो दाे साल तक वह सुरक्षित रहे। उम्मीद की जानी चाहिए हाल ही में हुई घटना से भी सुरक्षा बलों की सुरक्षा करने वाले सबक लेंगे और आने वाले दिनों में हमारे जवानों पर नक्सली इस तरह का कोई बड़ा हमला नहीं कर पाएंगे।साय सरकार के समय नक्सलियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है, तो स्वाभाविक है वह भी तो मौके की ताक में रहेंगे कि सुरक्षा बलों को कैसे बड़ा नुकसान पहुंचाया जा सकता है,उनको मौका मिलेगा तो वह बड़ा नुकसान तो पहुंचाएंगे ही।यह तो सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी है कि नक्सलियों के सफाए के साथ ही अपनी सुरक्षा के प्रति वह सजग रहे ताकि नक्सलियों के पलटवार से बचा जा सके।नक्सलियों के बड़े हमले से बचने का एक ही तरीका है कि सुरक्षा बल के जवान सजग रहे, कोई चूक न हो।जवान सजग रहेंगे, उनसे कोई चूक नहीं होगी तो नक्सली बड़ा हमला कर ही नहीं सकते। वह कमजोर हो चुके है, पस्त हो चुके हैं।संख्या में कम हो चुके हैं।उनमें सुरक्षा बलों पर आमन सामने हमला करने की हिम्मत नहीं बची है। सुरक्षा बल अपनी सुरक्षा के प्रति सजग होकर नक्सलियों का सफाया करेंगे तो यह काम तय समय में किया जा सकता है।