गरियाबंद में अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय की सख्त जरूरत
राधेश्याम सोनवानी, रितेश यादव
गरियाबंद जिले में शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है। वर्तमान में जिले में 8 स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें हजारों छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इसके अतिरिक्त जिले में कई निजी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय भी संचालित हैं। इन विद्यालयों से हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी 10वीं और 12वीं की परीक्षा अंग्रेजी माध्यम में उत्तीर्ण कर रहे हैं।
बावजूद इसके, जिले में अभी तक एक भी अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय की स्थापना नहीं हुई है। इससे विद्यार्थियों को स्नातक स्तर की उच्च शिक्षा (जैसे B.A., B.Sc., B.Com. आदि) के लिए रायपुर, महासमुंद या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे ग्रामीण और आदिवासी परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है, और कई मेधावी छात्र आगे की पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं।
अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा पाने वाले विद्यार्थियों के लिए महाविद्यालय स्तर पर स्थानीय विकल्प का न होना जिले की एक बड़ी शैक्षणिक कमी है। प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और करियर की दृष्टि से अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा अत्यंत आवश्यक होती जा रही है। यदि गरियाबंद में अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय की स्थापना होती है, तो इससे न केवल शैक्षणिक स्तर सुधरेगा, बल्कि रोजगार और सामाजिक जागरूकता को भी बल मिलेगा।
छात्र, अभिभावक और शिक्षाविद सभी एक स्वर में यह मांग कर रहे हैं कि शासन को इस दिशा में गंभीरता से विचार कर जिले में शासकीय अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय की स्थापना करनी चाहिए। यह कदम गरियाबंद के शैक्षणिक भविष्य को सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होगा।