धान घोटाले के फरार आरोपियों तक अब तक नहीं पहुंच सकी पुलिस
कबीरधाम |
2026-07-27 16:50:50
**धान घोटाले के फरार आरोपियों तक अब तक नहीं पहुंच सकी पुलिस**-39 केन्द्रों में सब कुछ ठीक 69 केंद्रों में गड़बड़ी फिर भी सिर्फ 6 प्रबन्धकों पर fir "क्या बाकी को अभयदान?
"विकाश शुक्ला"
कवर्धा। कबीरधाम जिले में धान खरीदी में सामने आई अनियमितताओं ने पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के 108 धान उपार्जन केंद्रों के भौतिक सत्यापन में केवल 39 केंद्रों में ही कोई कमी नहीं मिली, जबकि शेष 69 केंद्रों में धान की कमी दर्ज की गई। इसके बावजूद अब तक केवल छह समिति प्रबंधकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना और कई आरोपी महीनों बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहना जांच और कार्रवाई की दिशा पर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार अब तक दर्ज मामलों में समिति प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी के विरुद्ध अकेले तीन धान उपार्जन केंद्रों से जुड़े प्रकरण दर्ज किए गए हैं। वहीं कुकदूर उपार्जन केंद्र से जुड़े मामले में उपार्जन केंद्र प्रभारी अमित बाजपेयी को न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। इसके अलावा बम्हनी सहित अन्य उपार्जन केंद्रों के प्रभारी , कंप्यूटर ऑपरेटर और फड़ प्रभारियों के खिलाफ भी अपराध दर्ज किए गए हैं। इनमें से कई आरोपी अब तक फरार बताए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आरोपियों की पहचान, पद और पते पुलिस के पास उपलब्ध हैं, तब भी उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो पा रही है। आर्थिक अनियमितता जैसे गंभीर मामलों में आरोपियों का लंबे समय तक गिरफ्त से बाहर रहना स्वाभाविक रूप से कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है। जिले में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर पुलिस उन्हें तलाशने में असफल है या फिर उन्हें किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा है। हालांकि संरक्षण संबंधी किसी भी दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भौतिक सत्यापन में 69 उपार्जन केंद्रों में कमी सामने आने के बाद यह प्रश्न भी उठ रहा है कि यदि अनियमितताएं इतने बड़े स्तर पर मिली हैं तो कार्रवाई केवल छह प्रबंधकों तक ही क्यों सीमित है। क्या अन्य केंद्रों की जांच पूरी हो चुकी है या अभी प्रक्रिया जारी है, इस पर भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
धान खरीदी की पूरी व्यवस्था में उपार्जन केंद्र प्रभारी , कंप्यूटर ऑपरेटर, फड़ प्रभारी, नोडल अधिकारी, परिवहन एजेंसियां, विपणन संघ और अन्य विभागीय स्तर की निगरानी शामिल रहती है। ऐसे में यदि बड़े पैमाने पर धान की कमी सामने आई है तो केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त होगी या पूरे तंत्र की जवाबदेही भी तय होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
लोगों का मानना है कि प्रत्येक उपार्जन केंद्र के स्टॉक रजिस्टर, परिवहन अभिलेख, मिलरों को जारी डीओ, बैंक भुगतान, ऑनलाइन प्रविष्टियां और भौतिक सत्यापन रिपोर्ट का मिलान किया जाए तो पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। साथ ही फरार आरोपियों के मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन और बैंक खातों की जांच भी महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।
जिले में धान खरीदी प्रकरण अब केवल कमी या स्टॉक अंतर का मामला नहीं रह गया है, बल्कि जांच की निष्पक्षता और कार्रवाई की गति भी चर्चा का विषय बन गई है। आम लोगों का कहना है कि यदि 108 में से केवल 39 केंद्रों का रिकॉर्ड सही मिला है, तो बाकी केंद्रों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस फरार आरोपियों को कब तक गिरफ्तार कर पाती है और क्या जांच का दायरा बढ़ाकर धान खरीदी से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की जाएगी या नहीं।