₹2.70 लाख के ऋण से मनीषा ने खड़ी की राइस मिल, अब आत्मनिर्भरता के साथ ग्रामीणों को भी मिल रही सुविधा
कभी रोजगार की तलाश और भविष्य की चिंता से जूझ रही 22 वर्षीय मनीषा नायक ने अवसर और सही मार्गदर्शन मिलने पर अपनी मेहनत से सफलता की नई कहानी लिखी है। जिला बीजापुर की निवासी मनीषा ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना ( PMFME ) के तहत ₹2.70 लाख का ऋण प्राप्त कर राइस मिल स्थापित की और आज आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का सहारा बनी हैं।
मनीषा बताती हैं कि लंबे समय तक रोजगार की तलाश के बावजूद उन्हें स्थायी अवसर नहीं मिल पा रहा था। इसी दौरान परिचित के माध्यम से उन्हें जिला उद्योग केंद्र, बीजापुर की जानकारी मिली। यहां उनकी मुलाकात डीआरपी श्री रमेश कुमार पुरी से हुई। उन्होंने PMFME योजना की जानकारी देते हुए स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।
प्रेरणा और मार्गदर्शन से उत्साहित होकर मनीषा ने भारतीय स्टेट बैंक, ब्लॉक भैरमगढ़ में PMFME योजना के अंतर्गत क्रेडिट लोन के लिए आवेदन किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें ₹2 लाख 70 हजार का ऋण स्वीकृत हुआ। इसी राशि से उन्होंने राइस मिल स्थापित की।
ग्रामीणों की परेशानी हुई दूर
मनीषा की राइस मिल शुरू होने से क्षेत्र के ग्रामीणों को भी बड़ी सुविधा मिली है। पहले स्थानीय लोगों को धान से चावल निकलवाने के लिए 5 से 8 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। इससे समय और परिवहन खर्च दोनों बढ़ते थे। अब गांव के नजदीक ही राइस मिल की सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों को राहत मिली है। मनीषा धान से चावल निकालने के साथ ब्रान (चोकर) और धान की भूसी भी उपलब्ध कराती हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। स्थानीय जरूरत को पूरा करने वाला यह छोटा उद्यम अब उनकी नियमित आय का माध्यम बन चुका है।
मेहनत और हौसले से बदली जिंदगी
व्यवसाय की शुरुआत में मशीन संचालन, ग्राहकों से संपर्क और कामकाज को व्यवस्थित करने जैसी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन मनीषा ने धैर्य और मेहनत से इनका सामना किया। आज उनकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर है और वे आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार के लिए मजबूत सहारा बन रही हैं।
मनीषा अपनी सफलता का श्रेय जिला उद्योग केंद्र, बीजापुर से मिले मार्गदर्शन और PMFME योजना से प्राप्त आर्थिक सहयोग को देती हैं। उनका कहना है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी अपना व्यवसाय स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। मनीषा का यह सफर इस बात की मिसाल है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ और दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर रोजगार तलाशने वाले युवाओं को रोजगार देने वाला उद्यमी बना सकती है।
हिंसा का रास्ता छोड़ने वालों को नई जिंदगी की राह -आत्मसमर्पित नक्सलियों को 4 करोड़ 84 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि
तीन वर्ष की सावधि जमा के माध्यम से मिलेगी राशि, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने को मिलेगा संबल
बीजापुर 08 सितम्बर 2026- छत्तीसगढ़ शासन की नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 के तहत हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास को मजबूत करने की दिशा में बीजापुर जिले में महत्वपूर्ण पहल की गई है। कलेक्टर श्री विश्वदीप ने नीति में उल्लेखित प्रावधानों के अनुसार आत्मसमर्पित नक्सलियों को 4 करोड़ 84 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि आहरण एवं संवितरण की स्वीकृति प्रदान की है।
इस पहल का उद्देश्य आत्मसमर्पित नक्सलियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन की ओर आगे बढ़ने के लिए आर्थिक संबल प्रदान करना तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से जोड़ना है। प्रोत्साहन राशि आत्मसमर्पित नक्सलियों के नाम से राष्ट्रीयकृत बैंकों में तीन वर्ष की सावधि जमा (एफडी) के माध्यम से प्रदान की जाएगी। नीति के प्रावधानों के अनुसार सावधि जमा की राशि के आहरण की प्रक्रिया निर्धारित शर्तों के अधीन होगी। पुलिस अधीक्षक द्वारा आत्मसमर्पित नक्सली के आहरण संबंधी प्रमाणन के उपरांत ही संबंधित आत्मसमर्पित नक्सली को जमा राशि निकालने की अनुमति प्रदान की जाएगी।
पुनर्वास नीति से मिल रहा नई शुरुआत का अवसर
आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य आत्मसमर्पित व्यक्तियों को सामान्य सामाजिक जीवन, रोजगार, स्वरोजगार और सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है। शासन की पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पित नक्सलियों को हिंसा और भय के वातावरण से बाहर निकलकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। बीजापुर जैसे पूर्व नक्सल प्रभावित जिले में इस प्रकार की पहल शांति, पुनर्वास और विकास के प्रयासों को मजबूती प्रदान करती है। 4 करोड़ 84 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि का संवितरण आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उन्हें आर्थिक स्थिरता के साथ सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत करने में मदद मिलेगी। कलेक्टर श्री विश्वदीप ने कहा कि शासन की पुनर्वास नीति का मूल उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें बेहतर भविष्य का अवसर उपलब्ध कराना है।