गरियाबंद पोषण पुनर्वास केंद्र ने गंभीर कुपोषित बच्चे ओमेष को स्वस्थ कर भेजा घर
स्वास्थ्य में आया सुधार उपचार से वजन 5.1 से बढ़कर 6.40 किलोग्राम हुआ
जिला चिकित्सालय गरियाबंद स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में अब तक 3 हजार 876 बच्चों को भर्ती कर उपचार, पोषक आहार एवं विशेष देखभाल के माध्यम से कुपोषण से मुक्त किया गया है। भर्ती बच्चों के साथ उनकी माताओं के स्वास्थ्य, पोषण, देखभाल एवं स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।
माह अप्रैल से अगस्त 2026 तक केंद्र की बिस्तर अधिभोग दर 164 प्रतिशत तथा प्राप्तांक दर 95 प्रतिशत रही है। गरियाबंद के पोषण पुनर्वास केंद्र लगातार छत्तीसगढ़ में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त करता रहा है। केंद्र के संचालन में सिविल सर्जन डॉ. वाय. के. धु्रव, नोडल अधिकारी डॉ. अंकुश वर्मा, अस्पताल प्रबंधक डॉ. शंकर पटेल, आहार प्रदर्शनकर्ता अनीस अख्तर, स्टाफ नर्स डिगेश्वरी निषाद, खिलेश्वरी कंवर, मुनमुन देवांगन एवं रसोइया लक्ष्मी यादव का विशेष भूमिका रहता है।
पोषण पुनर्वास केंद्र में ग्राम दादरगांव की श्रीमती सुरेखा यादव के डेढ़ साल के बेटे ओमेश यादव को गंभीर कुपोषण की स्थिति में पोषण पुनर्वास केंद्र लाया गया। भर्ती के समय उसका वजन मात्र 5.1 किलोग्राम था। वह चलने-फिरने में असमर्थ था तथा निमोनिया, बुखार, सर्दी और कान के संक्रमण से पीडि़त था। जिसके कारण बच्चा लगातार चिड़चिड़ा रहता था। चिकित्सकीय जांच के बाद बच्चे को पोषक आहार, आवश्यक दवाइयां और विशेष देखभाल उपलब्ध कराई गई। साथ ही उसे नियमित रूप से चिकित्सा का लाभ दिया गया। 16 दिन के उपचार के बाद बच्चे का वजन बढ़कर 6.40 किलोग्राम हो गया। और उसकी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं दूर होने लगीं और वह चलने-फिरने तथा हंसने लगा। स्वास्थ्य में सुधार के बाद उसे आवश्यक दवाइयों के साथ केंद्र से छुट्टी दी गई।
इस दौरान बच्चे की मां को उचित खान-पान, साफ-सफाई, देखभाल एवं रखरखाव संबंधी आवश्यक जानकारी भी दी गई। केंद्र में निर्धारित अवधि तक रहने पर माता को प्रतिदिन 150 रुपये की दर से कुल 2 हजार 250 रुपये की सहायता राशि उसके बैंक खाते में प्रदान की गई।