छत्तीसगढ़ / सरगुजा

’सेवा संकल्प अभियान-2026’ : सेवा की कहानीः कृषक उन्नति योजना से शंकर प्रसाद को मिलेगा 45 हजार रुपये का लाभ, तीन एकड़ में की सुगंधित धान की खेती

 परंपरागत धान की जगह सुगंधित धान की खेती अपनाकर फसल विविधीकरण की दिशा में बढ़ाया कदम

कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि का मिलेगा लाभ

अम्बिकापुर 16 अक्टूबर 2026

  शासन की कृषक हितैषी योजनाएं किसानों को खेती में नवाचार अपनाने और अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। कृषक उन्नति योजना के माध्यम से किसानों को परंपरागत खेती के साथ फसल विविधीकरण एवं वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी कड़ी में सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम लक्ष्मणगढ़ के कृषक शंकर प्रसाद ने इस वर्ष तीन एकड़ भूमि में सुगंधित धान की खेती कर नई पहल की है। उन्हें कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की दर से कुल 45 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि का लाभ भी मिलेगा।

तीन एकड़ में सुगंधित धान की खेती, नई संभावनाओं की ओर बढ़े कदम
कृषक शंकर प्रसाद ने परंपरागत धान की जगह इस वर्ष तीन एकड़ कृषि भूमि में सुगंधित धान की खेती की है। खेती में यह बदलाव बेहतर उत्पादन एवं आर्थिक लाभ की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है। सुगंधित धान की खेती के माध्यम से किसान ने अपनी कृषि गतिविधियों में बदलाव लाने का प्रयास किया है। उनकी यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों को भी खेती में नई संभावनाएं तलाशने के लिए प्रेरित कर सकती है।

कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत उन्हें तीन एकड़ के लिए कुल 45 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। यह आर्थिक सहायता खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करने तथा आगामी कृषि कार्यों की तैयारी में सहायक हो सकती है।

प्रोत्साहन राशि से खेती को मिलेगा आर्थिक संबल
कृषक शंकर प्रसाद के लिए योजना के तहत मिलने वाली 45 हजार रुपये की राशि महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता साबित होगी। इससे बीज, खाद एवं अन्य कृषि आदानों की व्यवस्था करने में मदद मिल सकेगी। साथ ही खेती में नई तकनीकों और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा।

कृषक उन्नति योजना का उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं को बढ़ावा देना है। शासन की प्रोत्साहन आधारित पहल से किसान अपनी खेती में बदलाव लाने तथा उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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