छत्तीसगढ़ / दंतेवाड़ा

जिले में संपर्क फाउंडेशन का ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित, तकनीक आधारित शिक्षा पर दिया गया जोर’

 शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावी बनाने और बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार लाने पर हुई चर्चा’

 
दंतेवाड़ा, 28 अक्टूबर 2026

’जिले स्थित विकासखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) कार्यालय में संपर्क फाउंडेशन द्वारा क्लस्टर अकादमिक कोऑर्डिनेटर्स (सीएसी) के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य संपर्क फाउंडेशन के शैक्षिक नवाचारों से परिचित कराना तथा तकनीक के प्रभावी उपयोग से विद्यालयों में शिक्षण प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के साथ बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार लाने की संभावनाओं पर चर्चा करना था।
    कार्यक्रम के दौरान संपर्क फाउंडेशन के संपर्क डिवाइस और उसके उपयोग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि यह उपकरण शिक्षकों को कक्षा में विभिन्न शिक्षण गतिविधियों के संचालन में सहायता प्रदान करता है। इसके माध्यम से तकनीक आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के साथ कार्यक्रम के क्रियान्वयन से संबंधित वास्तविक समय के आंकड़े भी प्राप्त किए जा सकते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर विद्यालयों में कार्यक्रम की प्रगति का आकलन करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलती है।ओरिएंटेशन कार्यक्रम में उपस्थित क्लस्टर अकादमिक कोऑर्डिनेटर्स ने संपर्क फाउंडेशन की पहल में रुचि दिखाई। इस दौरान विद्यालयों तक शैक्षिक नवाचारों को पहुंचाने, शिक्षकों को तकनीक के प्रभावी उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने तथा बच्चों के सीखने के स्तर में निरंतर सुधार लाने पर जोर दिया गया। चर्चा में यह भी रेखांकित किया गया कि तकनीक का उचित उपयोग शिक्षकों के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाने और कक्षा में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
    कार्यक्रम में दंतेवाड़ा की डिप्टी कलेक्टर सुश्री चंचल पैकरा, जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रमोद ठाकुर, विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री संतोष गुप्ता तथा खंड स्त्रोत समन्वयक दंतेवाड़ा श्री जितेंद्र शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन संपर्क फाउंडेशन की ओर से जिला समन्वयक श्री आनंद त्रिपाठी द्वारा किया गया। यह पहल विद्यालयी शिक्षा में तकनीक के प्रभावी उपयोग, शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से जिले के विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार लाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

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