छत्तीसगढ़ / रायपुर

धरसींवा में पत्रकारों का फूटा गुस्सा

@ सुरक्षा कानून की मांग को लेकर छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ ने निकाली आक्रोश रैली


सिलयारी। छत्तीसगढ़ में पत्रकारों पर हो रहे लगातार हमलों, फर्जी मुकदमों और पुलिसिया प्रताड़ना के खिलाफ पत्रकार जगत में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस दमनकारी नीति के विरोध में प्रदेश के सबसे बड़े क्षेत्रीय पत्रकार संगठन 'छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ' ने सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्ररथ गर्व के नेतृत्व में समूचे क्षेत्र के सैकड़ों पत्रकार एकजुट हुए और अपनी सुरक्षा तथा सम्मान की रक्षा के लिए धरसींवा विश्राम गृह से लेकर थाने तक एक विशाल और आक्रोशपूर्ण 'पत्रकार एकता रैली' निकाली। इस पैदल मार्च के दौरान पत्रकारों ने शासन-प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और निष्पक्ष पत्रकारिता के हक में अपनी आवाज बुलंद की। रैली के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा।

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्ररथ गर्व ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेशभर से लगातार ऐसी दुखद घटनाएं सामने आ रही हैं, जहां जनता की आवाज उठाने वाले कलमकारों को ही साजिशन निशाना बनाया जा रहा है। स्वस्थ लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा कुछ पक्षों के बयानों के आधार पर पत्रकारों को ही झूठे मामलों में सह-आरोपी बनाकर जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि जिस तरह हमारे सिलयारी के पत्रकार उस्मान सैफी को झूठे केस में फंसाया गया है, उसकी हम सभी पत्रकार कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। खोजी पत्रकारिता करने वालों पर इस तरह की राजनीति से प्रेरित और गैर-जिम्मेदाराना पुलिसिंग को पत्रकार बिरादरी अब कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

पैदल मार्च के बाद प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल धरसींवा थाने पहुंचा, जहां उन्होंने सीएसपी श्री लम्बोदर पटेल को पुलिस महानिदेशक और गृह मंत्री के नाम एक सख्त ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से महासंघ ने पत्रकारों पर दर्ज हुए सभी मनगढ़ंत मामलों की निष्पक्ष जांच करने और उन्हें तत्काल निरस्त करने की पुरजोर मांग की। प्रदेश अध्यक्ष ने साफ चेतावनी दी कि आए दिन पत्रकारों को डराने-धमकाने और उन पर झूठे मुकदमे लादने का जो सिलसिला चल पड़ा है, यदि उसे तुरंत नहीं रोका गया तो यह आंदोलन केवल धरसींवा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में उग्र रूप धारण करेगा।

इस आंदोलन के दौरान 'पत्रकार सुरक्षा कानून' को तत्काल लागू करने की मांग सबसे प्रमुखता से उठी। प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्ररथ गर्व के साथ महासंघ के उपाध्यक्ष पुनीत सोनकर, अब्दुल शमीम, सुधीर तंबोली आजाद, प्रेम सोनी, हेमन्त वर्मा, रेणु मिश्रा, सुरेंद्र जैन ,मो याकूब, परमानंद वर्मा,हेमदास बंजारे,हेमंत बंजारे , प्रेम लाल पाल,चंद्रकांत साहू, दुर्गा बंजारे सहित राजधानी, आरंग, तिल्दा और खरोरा ब्लॉक से आए भारी संख्या में ग्रामीण पत्रकारों ने एकजुटता की शपथ ली। सभी पत्रकार साथियों ने एक स्वर में कहा कि कलम की ताकत को किसी भी दमनकारी नीति से झुकाया नहीं जा सकता। प्रशासन को अब होश में आना होगा और पत्रकारों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करते हुए जल्द से जल्द सुरक्षा कानून लागू करना होगा।

Leave Your Comment

Click to reload image