छत्तीसगढ़ / बस्तर
जगदलपुर : विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन
ग्रामीण विकास रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन के संकल्प को साकार करने की दिशा में जगदलपुर स्थित शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय कुम्हरावंड के ऑडिटोरियम में ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन के अंतर्गत तीन दिवसीय संभाग स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। 03 से 05 अगस्त तक आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बस्तर संभाग के सभी 7 जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बीजापुर की जनपद पंचायतों के कुल 490 निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।
ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान निमोरा रायपुर के मार्गदर्शन में आयोजित इस गैर-आवासीय प्रशिक्षण शिविर में विशेषज्ञों और मास्टर ट्रेनर्स द्वारा जनप्रतिनिधियों को योजना के दूरगामी उद्देश्यों और प्रमुख कानूनी प्रावधानों की गहन जानकारी दी गई। कार्यशाला के दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर परिसंपत्तियों व विकास कार्यों की पहचान, ग्रामसभा से उनके अनुमोदन, तकनीकी स्वीकृति तथा क्रियान्वयन की पारदर्शी प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक जनोपयोगी परिसंपत्तियों के निर्माण की रणनीतियों पर विशेष मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में योजनाओं के प्रभावी निष्पादन के लिए अन्य शासकीय विकास कार्यक्रमों के साथ अभिसरण, शिकायत निवारण तंत्र और सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद जनप्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से मिली सीख बस्तर संभाग के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में रोजगार गारंटी, आजीविका संवर्धन और ग्राम पंचायतों के समग्र विकास को गति देने में एक निर्णायक भूमिका निभाएगी।
जगदलपुर : बस्तर की 21 ग्राम पंचायतों को स्वच्छ और सुंदर बनाने की बड़ी पहल
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को एक नई दिशा देने और पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण जिला पंचायत बस्तर द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। गुरुवार 06 अगस्त को जिला पंचायत सभागार बस्तर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले की चयनित 21 ग्राम पंचायतों के सरपंच, उपसरपंच, सचिव और स्वच्छताग्राहियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है, ताकि वे अपने क्षेत्र में स्वच्छता की कमान मजबूती से संभाल सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य ध्येय ग्राम पंचायतों में वैज्ञानिक एवं सतत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना तथा कचरे को उसके संग्रहण स्थल यानी घरों व संस्थानों से ही अलग-अलग करने की आदत को बढ़ावा देना है। इस कार्यशाला में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण छत्तीसगढ़ की राज्य सलाहकार श्रीमती मधुरिमा महेन्द्र गिरी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगी। वे उपस्थित जनप्रतिनिधियों और स्वच्छताकर्मियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रमुख प्रावधानों, पंचायतों की भूमिका एवं दायित्वों, तथा सूखा, गीला, हानिकारक और सैनिटरी जैसे चार प्रकार के कचरे के सही पृथक्करण की विस्तार से जानकारी प्रदान करेंगी।
इसके साथ ही कार्यशाला में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की सुचारू व्यवस्था, उपयोगकर्ता शुल्क के निर्धारण और ग्राम पंचायत स्तर पर उपविधियों के निर्माण व पालन पर भी गहन चर्चा की जाएगी। इस एक दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने-अपने ग्राम पंचायतों में नियमों का कड़ाई और प्रभावशीलता से पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि बस्तर के ग्रामीण अंचल स्वच्छ, सुंदर और सतत विकास के नए आयाम स्थापित कर सकें।
दिव्यांगजनों की अत्याधुनिक पुनर्वास सेवाएं पीआरआरसी माना कैम्प में उपलब्ध
उत्तर बस्तर कांकेर । फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर (पीआरआरसी) एवं सेरेब्रल पॉल्सी गेट लैब माना कैम्प रायपुर एक विशेषीकृत पुनर्वास संस्थान है, जहां विभिन्न प्रकार के दिव्यांगजनों को आधुनिक तकनीकों एवं विशेषज्ञ सेवाओं के माध्यम से निःशुल्क पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी तथा जिला मिशन समन्वयक को पत्र जारी कर उक्त संस्था के माध्यम से दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क कृत्रिम अंग, ऑर्थोटिक उपकरण, विशेष सहायक उपकरण का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर क्षीरसागर द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि माना कैम्प रायपुर स्थित पीआरआरसी एवं सेरिब्रल पॉल्सी गेट लैब में स्थापित अत्याधुनिक फिजियोथैरेपी एवं गेट एनालिसिस मशीनों के माध्यम से विशेषज्ञ फिजियोथैरेपिस्ट द्वारा वैज्ञानिक पद्धति से फिजियोथैरेपी, गेट टेªनिंग, बैलेंस ट्रेनिंग, मसल रिएजुकेशन तथा पुनर्वास सेवाएं वर्तमान में प्रदान की जा रही है। इन सुविधाओं से विशेष रूप से सेरेब्रल पॉल्सी, स्ट्रोक, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, न्यूरोलॉजिकल एवं अस्थि संबंधी दिव्यांगजनों को अत्याधिक लाभ प्राप्त हो रहा है। यह भी बताया गया कि संस्थान द्वारा उक्त सेवाएं निःशुल्क प्रदाय की जा रही हैं। कलेक्टर ने पत्र के माध्यम से निर्देशित किया है कि विशेष रूप से स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रहे अथवा ऐसे बच्चे जो उक्त समस्या के चलते शिक्षा प्राप्त करने से वंचित हों, का चिन्हांकन करें तथा सभी स्वास्थ्य केंद्रों, जनपद पंचायतों, नगरीय निकायों, विशेष विद्यालयों तथा समावेशी शिक्षा से जुड़ी संस्थाओं तक इन निःशुल्क पुनर्वास सेवाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे पात्र दिव्यांगजनों को इसका लाभ मिल सके।
शिक्षक भर्ती परीक्षा कोचिंग के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा के परिणाम घोषित, काउंसिलिंग 5 को
उत्तर बस्तर कांकेर । छत्तीसगढ़ शासन की आगामी शिक्षक एवं सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2026 की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए जिला प्रशासन कांकेर द्वारा आयोजित स्क्रीनिंग परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। स्क्रीनिंग परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों की निःशुल्क शिक्षक भर्ती परीक्षा कोचिंग के लिए काउंसिलिंग 5 अगस्त को सुबह 10 बजे से निर्धारित अध्ययन केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। काउंसलिंग के बाद अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से प्रवेश दिया जाएगा।
इस संबंध में बताया गया कि काउंसिलिंग मावा मोदोल निःशुल्क कोचिंग सेंटर, कांकेर (कचहरी चौक) तथा मावा मोदोल निःशुल्क कोचिंग सेंटर, भानुप्रतापपुर (बीईओ कार्यालय के समीप) में आयोजित होगी। चयनित अभ्यर्थियों के लिए दोनों केंद्रों पर 6 अगस्त 2026 से नियमित कक्षाएं प्रारंभ की जाएंगी। कोचिंग के दौरान विषय विशेषज्ञों द्वारा पाठ्यक्रम आधारित अध्यापन, नियमित टेस्ट, मॉडल प्रश्नपत्रों का अभ्यास, डाउट क्लास तथा परीक्षा उन्मुख मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे अभ्यर्थियों को शिक्षक भर्ती परीक्षा की बेहतर तैयारी का अवसर मिलेगा।
जिला शिक्षा अधिकारी ने चयनित अभ्यर्थियों से निर्धारित तिथि एवं समय पर सभी आवश्यक मूल दस्तावेजों के साथ काउंसिलिंग में अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर प्रवेश सुनिश्चित करने की अपील की है। निर्धारित समय पर अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों के स्थान पर प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों को अवसर दिया जा सकता है।
कला के माध्यम से अभिव्यक्ति भी एक बड़ा हुनर : वनमंत्री केदार कश्यप
जगदलपुर । बस्तर की सकारात्मक छवि, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को रचनात्मक कला के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से सोमवार को जगदलपुर के एक निजी होटल में ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कार्यशाला का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहयोग से देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका ‘कार्टून वॉच’ द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में जिले के 10 विद्यालयों के 120 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि अपनी भावनाओं और विचारों को कला के माध्यम से अभिव्यक्त करना भी एक विशेष हुनर है। उन्होंने कहा कि कार्टून और कैरिकेचर केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और विकास के सकारात्मक संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की सशक्त कला है। इस अवसर पर महापौर संजय पांडेय एवं एमआईसी सदस्य संग्राम सिंह, स्थानीय कार्टूनिस्ट सुभाष पांडे और स्कूली शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।
कार्यशाला में दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट माधव जोशी और पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर कलाकार शुभम जिंदे ने लाइव डेमो के माध्यम से विद्यार्थियों को कार्टून एवं कैरिकेचर निर्माण की तकनीकें सिखाईं। उन्होंने विद्यार्थियों को कला के सामाजिक महत्व, रचनात्मक संभावनाओं तथा रोजगार के अवसरों की भी जानकारी दी।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर विकास, विश्वास और नई संभावनाओं के साथ नई पहचान बना रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर दशहरा तथा जनजातीय संस्कृति जैसी धरोहरें बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिला रही हैं। ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्यशाला का उद्देश्य इन्हीं सकारात्मक पहलुओं को कार्टून कला के माध्यम से रचनात्मक रूप में प्रस्तुत करना है।
‘कार्टून वॉच’ के संपादक त्र्यंबक शर्मा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच विकसित करना और बस्तर की खूबियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ बस्तर की सकारात्मक पहचान को देशभर में स्थापित करने की दिशा में एक अभिनव प्रयास है। यह आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपराओं और
प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। इस अवसर पर कैरिकेचर कलाकार शुभम जिंदे ने वनमंत्री और महापौर का कैरिकेचर बनाकर उनको भेंट की। ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कैनवास कार्यशाला में कलेक्टर आकाश छिकारा ने पहुंचकर प्रतिभागी स्कूली बच्चों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने बच्चों द्वारा बनाए जा रहे कार्टून और रचनात्मक चित्रों का अवलोकन किया तथा उनकी कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति की सराहना की।
कलेक्टर छिकारा ने कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देने का प्रभावी साधन भी है। कार्टून जैसी विधा बच्चों में रचनात्मक सोच, संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों को विकसित करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी कल्पनाओं को रंगों और रेखाओं के माध्यम से समाज के सामने प्रस्तुत करें तथा सकारात्मक बदलाव के वाहक बनें। कार्यशाला में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और पुरस्कार प्राप्त किया ।
बारिश के दौरान पुल के ऊपर जल स्तर बढ़ने पर राहगीरों की आवाजाही बंद हो, यह सुनिश्चित करें अनुविभागीय अधिकारी
उत्तर बस्तर कांकेर । समय-सीमा की साप्ताहिक समीक्षा बैठक का आयोजन आज सुबह कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर की अध्यक्षता में जिला कार्यालय के सभाकक्ष में किया गया।
इस दौरान उन्होंने वर्तमान में बारिश के दौरान ऐसे संवेदनशील पुल-पुलियों पर आवाजाही तत्काल प्रभाव से बंद कराने के निर्देश दिए, जिन पर जल का स्तर पुल के ऊपर आ चुका हो। उन्होंने सभी अनुविभागीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने कहा कि ग्रामीण अथवा राहगीर अपनी जान जोखिम में डालकर पुल कदापि पार न करें। साथ ही ऐसे स्कूल, जहां बारिश के दौरान आवाजाही खतरनाक हो, उन स्कूलों के विद्यार्थियों व शिक्षकों को नजदीक के स्कूल में बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित कराने व अध्यापन कार्य कराने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी को दिए, जहां सुगमता से पहुंचा जा सके।
कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आज सुबह आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर क्षीरसागर ने आगामी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एसआईआर तथा जनगणना कार्य में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को सम्मानित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के सफल आयोजन के लिए सभी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कलेक्टर ने सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त आवेदनों के अब तक लंबित होने पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे गंभीरता से नहीं लेने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के लिए भी निर्देशित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री पोर्टल, मुख्यमंत्री जनदर्शन, सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त आवेदनों का प्राथमिकता से गुणवत्तापूर्वक निराकरण करने के निर्देश सभी अधिकारियों को दिए। इसके अलावा ई-ऑफिस, ई-अटेंडेंस का नियमित रूप से उपयोग करने हेतु सभी अधिकारियों को निर्देशित किया।
कलेक्टर ने बस्तर मुन्ने, सुशासन तिहार तथा नियद नेल्लानार योजना के तहत प्राप्त आवेदनों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। इसी तरह ज्ञान भारतम पांडुलिपि, निष्क्रिय एवं डीफ बैंक एकाउंट, प्रधानमंत्री आवास योजना, खनिज न्यास निधि के तहत निर्माण कायों, नेल्लानार पंचायतों में विकास कार्य, विशेष केंद्रीय सहायता मद के तहत स्वीकृत कार्य, ग्राम स्वराज अभियान, आयुष्मान वय वंदना, स्मार्ट मीटर सहित राजस्व विभाग में लंबित एग्रीस्टैक पंजीयन के प्रकरणों में तेजी लाने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
इसी तरह मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक दवाइयां की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के भी निर्देश मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए। बैठक में जिला पंचायत के सीईओ हरेश मंडावी ने बस्तर मुन्ने अभियान के तहत ग्रामीणों को सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कर वितरित करने के लिए शीघ्र कार्यवाही करने हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया। इसके अलावा विभिन्न विभागों में लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इस अवसर पर अपर कलेक्टर द्वय जितेन्द्र कुर्रे एवं ए.एस. पैकरा, अनुविभागीय अधिकारीगण तथा जिला स्तर के अधिकारी मौजूद थे।
कलेक्टर जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों के निराकरण के निर्देश :
बैठक के उपरांत कलेक्टर जनदर्शन में आवेदकों से आवेदन प्राप्त कर कलेक्टर क्षीरसागर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को ग्रामीणों की विभिन्न मांगों एवं समस्याओं का निराकरण करने के निर्देश दिए।
सीएमएचओ ने किया पीएचसी आड़ावाल एवं सीएचसी नानगुर का औचक निरीक्षण
जगदलपुर, । कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशानुसार ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने और आम जनता को मिल रही चिकित्सा सुविधाओं का धरातल पर जायजा लेने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आड़ावाल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नानगुर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दोनों केंद्रों की ओपीडी, आईपीडी, पैथोलॉजी लैब, लेबर रूम और औषधि भंडार का निरीक्षण करते हुए स्वास्थ्य केन्द्र तथा परिसर में स्वच्छता एवं साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ डॉ. बसाक ने स्वास्थ्य केंद्रों में सभी आवश्यक और जीवनरक्षक दवाइयों की सतत उपलब्धता बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि दवाइयों की किसी भी तरह की कमी न हो, इसके लिए सीजीएमएससी के माध्यम से तत्काल ऑनलाइन इंडेंट भेजा जाए। मानसून के मौसम को देखते हुए उन्होंने स्वास्थ्य अमले को पूरी तरह चैकस रहने की हिदायत दी और मौसमी बीमारियों की रोकथाम व उपचार सुनिश्चित करने कहा। इसके साथ ही उन्होंने नानगुर सीएचसी के आईपीडी वार्ड में भर्ती मलेरिया रोगियों के स्वास्थ्य का हाल जाना और डॉक्टरों को उनका नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं नानगुर में एचपीवी वैक्सीन लगवा चुकी छात्राओं से सीधे बातचीत कर उन्होंने इस टीके के महत्व और उससे मिलने वाले स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूक भी किया। इस दौरान बीएमओ डॉ. आरएस भंवर, ग्रामीण चिकित्सा सहायक महेश मिश्रा और सेक्टर सुपरवाइजर नरेश मरकाम सहित स्थानीय स्वास्थ्य अमला उपस्थित रहा।
सेवानिवृत्त 25 शासकीय सेवकों को दी गई भावभीनी विदाई
जगदलपुर । कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में शुक्रवार को सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों का एक विशेष सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया, जहाँ विभिन्न शासकीय विभागों में अपनी दीर्घकालिक सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुए 25 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शॉल व श्रीफल भेंटकर भावभीनी विदाई दी गई। इस अवसर पर कलेक्टर आकाश छिकारा ने सभी सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों के अमूल्य योगदान की सराहना करते हुए उन्हें पेंशन भुगतान आदेश और सेवानिवृत्ति लाभ संबंधी दस्तावेज सौंपे। कार्यक्रम में वरिष्ठ कोषालय अधिकारी अनिल कुमार पाठक सहित सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी, उनके परिजन तथा कोषालय के कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कलेक्टर आकाश छिकारा ने कहा कि वर्षों की लंबी शासकीय सेवा के बाद सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त होना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने रेखांकित किया कि विभिन्न विभागों में इन कर्मचारियों द्वारा निष्ठापूर्वक किए गए कार्यों से ही जिले का विकास संभव हो पाया है। कलेक्टर ने सेवानिवृत्त कर्मियों को जीवन की दूसरी पारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सेवा के दौरान शासकीय व्यस्तताओं के कारण कई बार परिवार और निजी कार्य रह जाते हैं। अब वह समय है जब सभी को अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहिए तथा अपने अधूरे कार्य पूरे करने चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि कर्मचारी केवल सेवानिवृत्त हुए हैं, थके नहीं हैं, इसलिए समाज और प्रशासन को अभी भी उनके लंबे अनुभव की आवश्यकता है। उन्होंने सभी से कनिष्ठ सहयोगियों का मार्गदर्शन करने और एक सजग नागरिक के रूप में समाज के उत्थान में योगदान देने की अपील की। समारोह के अंत में वरिष्ठ कोषालय अधिकारी अनिल कुमार पाठक ने सभी का आभार व्यक्त किया, जहाँ परिजनों ने इस आत्मीय सम्मान के लिए जिला प्रशासन के प्रति गहरी कृतज्ञता जताई।
बेंगलुरु की फॉक्सकॉन कंपनी में 12 युवतियों का चयन,कलेक्टर ने सौंपे नियुक्ति पत्र
जगदलपुर । बस्तर की प्रतिभाएं अब देश के अग्रणी औद्योगिक मंचों पर अपनी पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। जिला प्रशासन बस्तर के सतत प्रयासों के फलस्वरूप जिले की 12 युवतियों का चयन विख्यात इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता कंपनी फॉक्सकॉन बेंगलुरु में हुआ है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर कलेक्टरेट में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर आकाश छिकारा ने नियुक्ति पत्र प्रदान कर उनके सफल, सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तन्मय खन्ना एवं सहायक कलेक्टर यशवंत नायक भी उपस्थित थे।
संवाद के दौरान कलेक्टर आकाश छिकारा ने सभी चयनित बेटियों को बधाई देते हुए उनकी चयन प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने युवतियों का हौसला बढ़ाते हुए आश्वस्त किया कि दूसरे शहर में कार्य करने के दौरान यदि उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या या चुनौती का सामना करना पड़े, तो वे बिना किसी झिझक के तत्काल जिला प्रशासन को सूचित करें। प्रशासन हर कदम पर उनकी सुरक्षा और सहयोग के लिए सदैव ढाल बनकर खड़ा रहेगा। इसी क्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने सभी चयनित युवतियों को शुभकामनाएँ देते हुए कार्यस्थल पर पूरी निष्ठा, लगन और ईमानदारी से कार्य सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यहाँ प्राप्त बेहतर अनुभव भविष्य में प्रगति के नए और उत्कृष्ट अवसर दिलाने में सहायक सिद्ध होगा। वहीं सहायक कलेक्टर ने चयनित युवतियों को निडर रहकर, पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और हर परिस्थिति में निरंतर सीखते रहने का संदेश दिया।
इस सफलता के पीछे जिला प्रशासन के विभिन्न घटकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। चयन प्रक्रिया से जुड़ी युवतियों में से कुछ ने जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज जगदलपुर से कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किया था, जबकि अन्य युवतियाँ लाइवलीहुड कॉलेज द्वारा आयोजित प्लेसमेंट कैंप के माध्यम से इस अवसर से जुड़ीं। इस पूरे सफर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की दीदियों ने भी युवतियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाई। साथ ही स्वयंसेवी संगठन प्रदान संस्था की टीम ने नियोजन हेतु किए गए प्रयासों और संपूर्ण प्लेसमेंट प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी साझा की। बस्तर की इन बेटियों की यह सफलता न केवल उनके परिवारों को आर्थिक मजबूती देगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए स्वावलंबन का एक नया मार्ग प्रशस्त करेगी।
तेलीमारेंगा के किसान महादेव मौर्य ने धान रोपाई मशीन से उन्नत खेती-किसानी को दी नई दिशा
जगदलपुर । कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और उन्नत कृषि यंत्रों के बढ़ते उपयोग ने किसानों की राह बेहद आसान कर दी है। इसी कड़ी में तेलीमारेंगा गांव के प्रगतिशील किसान महादेव मौर्य ने इस बार धान रोपाई के लिए आधुनिक राइस ट्रांसप्लांटर (धान रोपाई मशीन) का उपयोग कर पारंपरिक खेती को एक नया मोड़ दिया है।
महादेव मौर्य के पास 8 एकड़ पैतृक कृषि भूमि है और उन्होंने 8 एकड़ भूमि लीज (ठेके) पर लेकर कुल 16 एकड़ में खेती की है। इस मौसम में मजदूरों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस नवीन धान रोपाई मशीन के उपयोग से न केवल मजदूरी पर निर्भरता कम हुई है, बल्कि समय की भी भारी बचत हो रही है। जहां हाथ से रोपाई कराने में काफी समय और दर्जनों मजदूर लगते थे, वहीं इस मशीन के जरिए केवल दो से तीन लोगों की मदद से रोपाई का काम बेहद सुगमता से पूरा हो जाता है।
किसान महादेव मौर्य ने बताया कि पारंपरिक तरीके से हाथ से रोपाई कराने पर प्रति एकड़ लगभग सात से आठ रुपए तक का खर्च आ जाता था, जबकि धान रोपाई मशीन का उपयोग करने से यह खर्च घटकर मात्र दो से ढाई हजार रुपए प्रति एकड़ रह गया है। इस मशीन की खरीदारी में उन्हें शासन की योजना से अनुदान का भी बड़ा सहारा मिला। मशीन की कुल कीमत 9 लाख रुपए थी, जिस पर उन्हें 4 लाख रुपए की बड़ी सब्सिडी मिली और यह आधुनिक मशीन उन्हें 5 लाख रुपए में उपलब्ध हो सकी, जो एक किसान के लिए काफी सहूलियत भरा साबित हुआ।
महादेव कहते हैं कि मशीन से रोपाई करने पर पौधों के बीच समान दूरी बनी रहती है, जिससे फसल का विकास बेहतर होता है और पैदावार अधिक मिलने की पूरी उम्मीद है। आसपास के किसान भी उनके इस सफल प्रयोग को देखकर काफी प्रभावित हैं और भविष्य में इस तकनीक को अपनाने की बात कह रहे हैं। महादेव मौर्य का यह अनुभव साबित करता है कि आधुनिक मशीनरी के उपयोग से खेती न केवल किफायती और आसान साबित हो रही है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती प्रदान करेगी।
रायपुर : बस्तर के कायाकल्प की योजना लेकर प्रधानमंत्री से मिले सीएम साय
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बस्तर के समग्र विकास का रोडमैप प्रधानमंत्री के सामने रखा और राज्य की कई प्रमुख परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से तीन प्रमुख विषयों पर विशेष सहयोग मांगा। पहला, राजनांदगांव में प्रस्तावित 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र मंजूरी दी जाए। उन्होंने बताया कि इसके लिए भूमि उपलब्ध करा दी गई है और राज्य सरकार की सभी आवश्यक स्वीकृतियां भी पूरी हो चुकी हैं। परियोजना शुरू होने से किसानों को बड़ी सुविधा मिलेगी और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।
दूसरा, जिन 461 गांवों में पहले सुरक्षा कारणों से बिजली का ग्रिड नहीं पहुंच पाया था और जहां फिलहाल ऑफ-ग्रिड बिजली व्यवस्था है, उन्हें स्थायी ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहायता देने का आग्रह किया गया। तीसरा, मुख्यमंत्री ने रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (।प्प्।) की स्थापना के प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को ‘बस्तर विजन’ की जानकारी देते हुए बताया कि बस्तर अब तेज़ी से बदल रहा है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुहिम’ के माध्यम से बस्तर संभाग के 5,542 गांवों में सरकारी योजनाओं का व्यापक क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे लगभग 39 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब राशन, आयुष्मान भारत, जनधन, वनाधिकार और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों की जानकारी देते हुए बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बंद पड़े 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है। साथ ही दंतेवाड़ा की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है, ताकि दूरदराज़ के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तथा गीदम में मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं और राज्य में नए मेडिकल कॉलेजों एवं स्वास्थ्य अधोसंरचना का भी विस्तार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस बस्तर को कभी नक्सल हिंसा के लिए जाना जाता था, वहां अब सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 3,513 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेललाइन का निर्माण कार्य जारी है। साथ ही जगदलपुर से नियमित हवाई सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। उन्होंने रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे के अंतिम चरण और इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बैराज परियोजना की भी जानकारी दी, जिससे लगभग 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने बस्तर की संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड बनाने की दिशा में काम चल रहा है। साथ ही चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने क्षेत्र में शांति, विश्वास और सकारात्मक माहौल को मजबूत किया है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य में तेजी से बढ़ रहे निवेश की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू होने के बाद राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार एआई डेटा सेंटर पार्क, सेमीकंडक्टर प्लांट, हाइपरस्केल डेटा सेंटर, ग्लोबल बीपीओ, गारमेंट और चॉकलेट मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा इंट्राऑक्यूलर लेंस निर्माण जैसे नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार करने के कारण छत्तीसगढ़ को नीति आयोग के इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स में नियामकीय और संस्थागत माहौल के लिए देश में पहला स्थान मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 लागू किया है। यह देश का पहला ऐसा कानून है जिसमें जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था, सेल्फ सर्टिफिकेशन और समयबद्ध अनुमतियों को कानूनी रूप दिया गया है।
महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य ने लक्ष्य से अधिक 10.42 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाया है। अब सरकार अगले चरण में 14 लाख और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। उन्होंने वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित लखपति दीदी सम्मेलन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि छत्तीसगढ़ 500 करोड़ रुपये के राज्य एआई मिशन के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों को नई गति मिली है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य के विकास से जुड़े इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर केंद्र सरकार का सकारात्मक सहयोग प्राप्त होगा।
रायपुर : विशेष लेख : बस्तर में उच्च शिक्षा की नई भोर
100 करोड़ के 'मेरु' अनुदान और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों से सशक्त हो रहे बस्तर के युवा.
छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार के ऐतिहासिक सहयोग और राज्य सरकार के समर्पित प्रयासों से बस्तर संभाग में विकास की नई गाथा लिखी जा रही है। विशेषकर बस्तर के युवाओं को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कई बड़े और बुनियादी कदम उठाए गए हैं। छतीसगढ़ सरकार और प्रशासन द्वारा बस्तर के युवाओं को उच्च शिक्षा व आगे बढ़ने के लिए 'छू लो आसमान', 'ज्ञानगुड़ी' और 'हमर लक्ष्य' जैसी विशेष पहल चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं के जरिए स्थानीय विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग, आर्थिक सहायता और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल रहा है।
शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय को 100 करोड़ रुपए का अनुदान
बस्तर के युवाओं को विश्वस्तरीय और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से 'प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान' (PM-USHA) के अंतर्गत 'मेरु' (Multi Educational Research University- MERU) योजना के तहत शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर को 100 करोड़ रुपये का विशाल अनुदान प्रदान किया गया है। इस राशि का उपयोग विश्वविद्यालय में नवीन निर्माण, अधोसंरचना के उन्नयन, आधुनिक उपकरणों की खरीद तथा कार्यशाला, प्रशिक्षण, सेमिनार और कौशल विकास जैसे सॉफ्ट कंपोनेंट्स के लिए किया जाएगा।
20 नए विभाग और 365 पदों की स्वीकृति
विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों के व्यापक विस्तार के लिए 20 नए विभाग खोले गए हैं। शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 200 शैक्षणिक तथा 165 अशैक्षणिक (कुल 365) पदों की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे अंचल के युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन और पठन-पाठन का वातावरण मिल सकेगा।
रोजगारोन्मुखी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों पर जोर
युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगार से जोड़ने के लिए विश्वविद्यालय में कई व्यावसायिक व आधुनिक पाठ्यक्रमों की अनुमति दी गई है। इसमें शारीरिक शिक्षा, फार्मेसी, विधि (Law) तथा 4 वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (ITEP - Integrated Teacher Education Programme) का संचालन शामिल है। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में 'इनोवेशन महाकुंभ' जैसे आयोजनों से छात्रों में नई सोच और तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिल रहा है।
कॉलेजों के अधोसंरचना विकास के लिए 65 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति
बस्तर अंचल में शासकीय महाविद्यालयों के ढांचागत विकास को मजबूती देने के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 हेतु 65 करोड़ रुपये के कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। इस राशि से कॉलेज भवनों, अतिरिक्त कक्षों, बाउंड्रीवाल तथा छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावासों का निर्माण कराया जाएगा।
जिला मुख्यालयों के प्रमुख कॉलेजों को 5-5 करोड़ का विशेष फंड
बस्तर संभाग के जिला मुख्यालयों में स्थित उच्च शिक्षा संस्थानों की अधोसंरचना तथा कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए शासकीय काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जगदलपुर को 5 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया है। इसी तरह शासकीय इंदरु केंवट कन्या महाविद्यालय, कांकेर को भी 5 करोड़ रुपए का अनुदान नवीन निर्माण, उन्नयन एवं उपकरण खरीदी हेतु स्वीकृत किया गया है।
नए शासकीय-अशासकीय महाविद्यालयों का शुभारंभ और सीटों में वृद्धि
विगत दो वर्षों में बस्तर जिले के दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षा का प्रकाश फैलाने के लिए नगरनार और किलेपाल में 02 नए शासकीय महाविद्यालय शुरू किए गए हैं। साथ ही कंगोली (जगदलपुर) में एक अशासकीय महाविद्यालय खोलने की अनुमति भी दी गई है। युवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए महाविद्यालयों में सीटों की संख्या बढ़ाई जा रही है तथा नए संकाय व रोजगारोन्मुखी कोर्स शुरू किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में उच्च शिक्षा का बजट 50% बढ़ाकर युवाओं के लिए बेहतर अवसर, आधुनिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे इन दूरगामी परिवर्तनों और बुनियादी सुधारों से बस्तर का युवा न केवल शिक्षित हो रहा है, बल्कि रोजगार और स्व-रोजगार के अवसरों के साथ क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में अपना बहुमूल्य योगदान देने के लिए तैयार हो रहा है।
रायपुर : बस्तर में सड़क विकास को मिलेगी नई गति : सांसद महेश कश्यप ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से की मुलाकात
भारतमाला परियोजना से जगदलपुर को जोड़ने और प्रमुख मार्गों के फोरलेन निर्माण की मांग
बस्तर के सभी जिला मुख्यालयों को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने के लिए विशेष पैकेज का प्रस्ताव
दिल्ली प्रवास के दौरान बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री महेश कश्यप ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर बस्तर क्षेत्र में सड़क और राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव सौंपे। सांसद श्री कश्यप ने बस्तर में सड़क संपर्क को मजबूत करने, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने तथा क्षेत्र के समग्र विकास के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार और उन्नयन की आवश्यकता पर जोर दिया।
सांसद श्री कश्यप ने बताया कि सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों और प्रभावी रणनीति के कारण बस्तर में नक्सलवाद पर काफी हद तक नियंत्रण हुआ है। इसके परिणामस्वरूप उद्योग, व्यापार, पर्यटन और निवेश के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। इन संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक और बेहतर सड़क नेटवर्क आवश्यक है।
प्रमुख मार्गों को फोरलेन बनाने का प्रस्ताव
बस्तर सांसद ने एनएमडीसी स्टील प्लांट की गतिविधियों और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जगदलपुर-नगरनार-ओडिशा सीमा मार्ग को फोरलेन बनाने की मांग की। इसके साथ ही जगदलपुर-दंतेवाड़ा-बीजापुर-भोपालपटनम-तेलंगाना सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग को भी फोरलेन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा, जिससे छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र के बीच आवागमन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात तक पर्यटकों की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जगदलपुर-चित्रकोट मार्ग को भी चार लेन में विकसित करने की मांग की।
भारतमाला परियोजना से जोड़ने पर जोर
बस्तर सांसद श्री कश्यप ने जगदलपुर को भारतमाला परियोजना के आर्थिक गलियारों से जोड़ने, शहर में यातायात का दबाव कम करने के लिए रिंग रोड और बायपास के निर्माण तथा बस्तर संभाग के सभी जिला मुख्यालयों को उच्च गुणवत्ता वाले राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने के लिए विशेष विकास पैकेज स्वीकृत करने का आग्रह किया। उन्होंने सड़क सुरक्षा के लिए ब्लैक स्पॉट्स के सुधार, आवश्यक स्थानों पर पुल, फ्लाईओवर और रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का विषय भी प्रमुखता से उठाया।
बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से बस्तर में व्यापार, रोजगार, पर्यटन और निवेश को नई गति मिलेगी तथा क्षेत्र के समग्र विकास को मजबूती मिलेगी। इससे बस्तर राष्ट्रीय विकास के मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से उभरेगा।
राज्य खेल अलंकृत पुरस्कार, मुख्यमंत्री ट्रॉफी एवं डाइट मनी वर्ष 2025-26 के लिए आवेदन आमंत्रित
जगदलपुर 30 जुलाई 2026
राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों, उत्कृष्ट प्रशिक्षकों और निर्णायकों को सम्मानित करने के लिए वार्षिक राज्य खेल अलंकृत पुरस्कार, मुख्यमंत्री ट्रॉफी, नकद राशि, प्रेरणा निधि तथा खेलवृत्ति (डाइट मनी) वर्ष 2025-26 हेतु आवेदन प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है। इस योजना के तहत राज्य में खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न श्रेणियों में आकर्षक नगद पुरस्कार राशि की व्यवस्था की गई है। इसके अंतर्गत वरिष्ठ वर्ग के उन खिलाड़ियों को 3 लाख रुपए की नगद राशि के साथ शहीद राजीव पाण्डे पुरस्कार से अलंकृत किया जाएगा, जिन्होंने राष्ट्रीय चौंपियनशिप में पदक जीता हो या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया हो। इसी तरह कनिष्ठ वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को डेढ़ लाख रुपए की राशि के साथ शहीद कौशल यादव पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। उत्कृष्ट खेल प्रशिक्षकों और निर्णायकों को वीर हनुमान सिंह पुरस्कार के तहत डेढ़ लाख रुपए की राशि से सम्मानित किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त विगत पाँच वर्षों में चार बार छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को 25 हजार रुपए की राशि के साथ शहीद पंकज विक्रम सम्मान तथा 55 वर्ष या उससे अधिक आयु की उन खेल हस्तियों को शहीद विनोद चौबे सम्मान के साथ 25 हजार रुपए दिया जाएगा जिन्होंने खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएँ दी हैं।
दलगत खेलों के प्रोत्साहन के लिए मुख्यमंत्री ट्रॉफी की घोषणा भी की गई है, जिसमें ट्रॉफी, प्रमाण-पत्र, ब्लेजर और टाई के साथ-साथ चार सदस्यों तक के दल को सीनियर वर्ग में 2 लाख रुपए व जूनियर वर्ग में 1 लाख रुपए तथा चार से अधिक सदस्यों वाली टीमों को सीनियर वर्ग में 5 लाख रुपए और जूनियर वर्ग में 3 लाख रुपए का नगद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। खिलाड़ियों के खान-पान और दैनिक प्रोत्साहन हेतु खेलवृत्ति (डाइट मनी) और प्रेरणा निधि का भी प्रावधान रखा गया है। डाइट मनी के लिए 19 वर्ष तक की आयु के वे खिलाड़ी पात्र होंगे जिन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पदक हासिल किया हो या राष्ट्रीय प्रतियोगिता में राज्य का प्रतिनिधित्व किया हो। प्रेरणा निधि के लिए खिलाड़ी 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के मध्य अर्जित अपनी उपलब्धियों के आधार पर आवेदन जमा कर सकते हैं। सभी पुरस्कारों और प्रोत्साहन योजनाओं के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 05 अगस्त 2026 तय की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी अपने आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से खेल एवं युवा कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://sportsyw.cg.gov.in/cgsports/ पर अपलोड कर सकते हैं। शहीद पंकज विक्रम सम्मान के लिए आवेदन केवल खेल संघों की अनुशंसा के साथ ही स्वीकार्य होंगे। हालाँकि, यदि किसी खिलाड़ी की उपलब्धि तुलनात्मक रूप से अधिक है लेकिन खेल संघ द्वारा उसकी अनुशंसा नहीं की गई है, तो ऐसे खिलाड़ी 05 अगस्त 2026 तक कार्यालयीन समय में संचालनालय, खेल एवं युवा कल्याण, सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, जीई रोड रायपुर या संबंधित जिला खेल कार्यालयों में अपना व्यक्तिगत विवरण सीधे जमा कर सकते हैं।
दिव्यांगजनों के सपनों को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन देगी आसान ऋण, ट्रेनिंग और बाजार की गारंटी
दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया ने दिव्यांगों को किया प्रोत्साहित
समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राही हुए सम्मानित
जगदलपुर 30 जुलाई 2026
दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्वावलंबन की दिशा में सशक्त कदम उठाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लगातार प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को कलेक्टोरेट के आस्था कक्ष में दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम की एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर समय पर ऋण (लोन) की अदायगी करने वाले ईमानदार एवं सफल हितग्राहियों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही नए व्यवसाय और स्व-रोजगार की इच्छा रखने वाले दिव्यांग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उनकी आवश्यकताओं और योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन दिव्यांगजनों के कल्याण और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के तहत दिव्यांगजनों को अत्यंत रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें 50 हजार रुपये तक का ऋण मात्र 5 प्रतिशत ब्याज दर पर, 5 लाख रुपये तक का लोन 6 प्रतिशत ब्याज दर पर और 10 लाख रुपये तक का लोन 7 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध है। परियोजना की आवश्यकता के अनुसार 50 लाख रुपये तक का लोन प्रदान करने का प्रावधान भी रखा गया है। उन्होंने हितग्राहियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप समय पर ऋण की किस्तें चुकाने वालों को 25 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, किस्तों के भुगतान को सुलभ बनाने के लिए प्रतिदिन 100 रुपये जैसी दैनिक किस्त भुगतान प्रणाली की नई व्यवस्था भी शुरू की गई है।
कार्यक्रम में दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री पंकज वर्मा ने स्पष्ट किया कि केवल वित्तीय सहायता देना ही शासन का लक्ष्य नहीं है, बल्कि हितग्राहियों को एक सफल और स्वावलंबी उद्यमी बनाना मुख्य ध्येय है। इसके लिए 5 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा, जिसमें उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ डिजिटल मार्केटिंग, वित्तीय प्रबंधन और सीए के माध्यम से खातों के रखरखाव की व्यावहारिक शिक्षा दी जाएगी। हितग्राहियों के व्यवसाय को मजबूती देने के लिए शासन के निर्देशों के तहत सुमित कपड़ा बाजार और शुभम मार्ट जैसी स्थापित व्यावसायिक संस्थाओं के साथ एमओयू किया गया है, जिससे किराना, वस्त्र, जूते और लॉन्ड्री जैसे मूलभूत व्यवसायों में पूरा सहयोग मिल सके। इसके अलावा, दिव्यांगजनों द्वारा निर्मित सामग्री की निर्बाध बिक्री सुनिश्चित करने के लिए रायपुर में विशेष शोरूम और आउटलेट्स भी तैयार किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री सीपी बघेल ने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन राज्य शासन की मंशा के अनुरूप आवेदनों का त्वरित निस्तारण कर रहा है और दिव्यांगजनों की हर संभव सहायता के लिए तत्पर है। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग की उप संचालक श्रीमती सुचेता लकड़ा, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक के अंत में दृष्टिबाधित और अन्य दिव्यांग बच्चों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित हर्बल साबुन, मालाएं और क्राफ्ट्स प्रदर्शित किए गए, जिनकी उपस्थित अतिथियों ने मुक्तकंठ से सराहना की।
ग्रामीण स्व रोजगार प्रशिक्षण में स्व-सहायता समूह की दीदियों को दिया गया राखी बनाने का प्रशिक्षण
रक्षाबंधन त्यौहार के लिए प्राकृतिक राखियों का कर रही निर्माण
जगदलपुर 29 जुलाई 2026

तीज-त्यौहारों के अवसर पर स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके लिए अतिरिक्त आय के अवसर सृजित करने की दिशा में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (त्ैम्ज्प्) आड़ावाल जगदलपुर द्वारा 21 जुलाई से 26 जुलाई तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सातों जनपदों से आई स्व-सहायता समूह की तीस दीदियों को आकर्षक एवं पर्यावरण अनुकूल राखियां बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने धान, चावल, लालभाजी के बीज, कुकुम्बर (खीरा) के बीज, मयूर पंख, बांस तथा अन्य सजावटी सामग्री से सुंदर एवं कलात्मक राखियां तैयार करना सीखा। प्रशिक्षकों ने उन्हें डिजाइन चयन, रंग संयोजन, गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की बारीकियों से भी अवगत कराया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी प्रतिभागी दीदियां अपने-अपने जनपदों में लौटकर समूह की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर राखियां तैयार करेंगी। इससे एक ओर स्थानीय स्तर पर हस्तनिर्मित और प्राकृतिक सामग्री से बनी राखियों की उपलब्धता बढ़ेगी, वहीं महिलाओं को त्यौहारी सीजन में अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर भी मिलेगा।
प्राकृतिक सामग्री से तैयार ये राखियां पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती हैं। इन राखियों में स्थानीय संसाधनों का उपयोग होने से बस्तर की पारंपरिक कला और ग्रामीण महिलाओं की रचनात्मकता को भी नई पहचान मिल रही है। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान का यह प्रयास केवल कौशल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस रक्षाबंधन पर बाजार में स्व-सहायता समूह की दीदियों द्वारा तैयार की गई आकर्षक और पर्यावरण हितैषी राखियां लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है।
स्पान संवर्धन योजना बनी महिला किसान की आय का नया जरिया
दो महीने में 15 हजार रुपये की कमाई, अब अंगुलिका उत्पादन से बढ़ाएंगी आमदनी
जगदलपुर 28 जुलाई 2026

मछलीपालन विभाग की स्पान संवर्धन योजना बस्तर जिले के ग्रामीण किसानों के लिए आय का नया माध्यम बन रही है। बस्तर विकासखंड के ग्राम सिवनी की महिला किसान मनकी बघेल ने इस योजना का लाभ उठाकर मात्र दो माह में 15 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर मिसाल पेश की है।
मत्स्यपालन विभाग ने मनकी बघेल को मई माह में मिश्रित प्रजाति के लगभग 25 हजार स्पॉन उपलब्ध कराए। इसके साथ ही तालाब की उर्वरता बढ़ाने के लिए खाद तथा स्पान के आहार के रूप में खल्ली भी निःशुल्क प्रदान की गई। मनकी ने अपने परिवार के एक एकड़ क्षेत्र में स्थित दो तालाबों में स्पॉन का संवर्धन किया। नियमित रूप से भोजन देने, जाल चलाकर निगरानी करने और उचित देखभाल के कारण कम समय में ही उच्च गुणवत्ता की मत्स्य अंगुलिकाएं तैयार हो गईं।
मछलीपालन विभाग ने अंगुलिकाओं की पैकेजिंग और विपणन के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, पॉलिथीन बैग, बोरी तथा निःशुल्क जाल भी उपलब्ध कराया, जिससे तैयार मत्स्य बीज को सुरक्षित रूप से बाजार तक पहुंचाना आसान हो गया।
मनकी बघेल के भतीजे सुखलाल बघेल बताते हैं कि अब तक करीब 30 किलोग्राम मत्स्य अंगुलिकाओं की बिक्री 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा चुकी है, जिससे परिवार को सीधे 15 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में तालाब में लगभग 50 किलोग्राम अंगुलिकाएं और तैयार हैं, जिनकी बिक्री से अच्छी अतिरिक्त आमदनी होने की उम्मीद है।
सुखलाल का कहना है कि अंगुलिका उत्पादन का कार्य सामान्य मछलीपालन की तुलना में अधिक लाभदायक साबित हो रहा है। इसी अनुभव से उत्साहित होकर परिवार ने अगले वर्ष इस गतिविधि का विस्तार करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि परिवार सात एकड़ भूमि में खरीफ सीजन के दौरान उन्नत धान की खेती करता है, जबकि रबी सीजन में नदी किनारे दो एकड़ क्षेत्र में मक्का एवं विभिन्न साग-सब्जियों का उत्पादन करता है। अब कृषि के साथ-साथ अंगुलिका उत्पादन और मत्स्य पालन को भी आय का मजबूत स्रोत बनाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को और सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।